जब देश स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष की ओर बढ़ रहा है, तब इस सफर की कहानी को सुनना-सुनाना नई पीढ़ी के लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकता है.
सोशल मीडिया,सूचना क्रांति और शॉर्टकट के इस दौर में इतिहास की मोटी- मोटी पोथियों के पारायण की उम्मीद लोगों से करना बेमानी है.
कदाचित इसी को ध्यान में रखते हुए मेगस्थनीज,फाह्यान,ह्वेनत्सांग,अलबरूनी, मार्कोपोलो, वास्को डि गामा जैसे यात्रियों के भारत संबंधी विवरणों से लेकर सदियों की नियोजित लूट-खसोट, परतंत्रता का अंधकारमय काल, स्वतंत्रता संघर्ष और आज़ादी के बाद के 75 सालों के देश के सफ़र को संक्षिप्त किंतु सारगर्भित स्वरूप में प्रस्तुत किया है वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने अपनी कृति “हिंदुस्तान का सफर”में.
श्री बादल इसके पीछे सदी के सूबूत की तरह हमारे बीच मौजूद,मनसा-वाचा-कर्मणा गांधी पथ के पथिक,96 वर्षीय श्रद्धेय श्री प्रेम नारायण नागर जी की प्रेरणा एवं वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री विभूषित श्री विजय दत्त श्रीधर के उत्साहवर्धन को मानते हैं.
श्री नागर कहते हैं- “हम क्या थे…क्या हैं…और क्या होंगे ? इसका संक्षिप्त दस्तावेजीकरण है “हिंदुस्तान का सफर” शीर्षक कृति.
“हिंदुस्तान का सफ़र” गागर में सागर जैसी कृति है जो अत्यंत संक्षेप में अतीत से लगाकर वर्तमान तक के सारे घटनाक्रमों को एक सूत्र में ऐसे पिरोती है कि विवरण उबाऊ नहीं लगता,अपितु रोचकता बनी रहती है.
आज के दौर में जब पठन-पाठन के प्रति भयावह उदासीनता है, ऐसी छोटी-छोटी रोचक और ज्ञानवर्द्धक पुस्तकें उम्मीद जगाती हैं.
जिन्हें जरा सी भी ललक है हमारे स्वर्णिम अतीत,गुलामी की लंबी काली रात, स्वतंत्रता संघर्ष और स्वतंत्रता के बाद देश में घटित प्रमुख घटनाओं, उल्लेखनीय उपलब्धियों आदि के बारे में जानने की, उन्हें गौरव मेमोरियल फाउंडेशन,भोपाल द्वारा प्रकाशित “हिंदुस्तान का सफर”जरूर पढ़ना चाहिए. खास तौर से युवा वर्ग को.
*अरविन्द श्रीधर

