सप्रे संग्रहालय में सम्मान समारोह का आयोजन

karmveer By karmveer
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विभूतियों का सम्मान समाज का दायित्व: विजय मनोहर तिवारी

भोपाल। ऐसी विभूतियां जो व्यापक समाज हित के लिए विशिष्ट और मूल्यवान कार्य कर रही हैं, उनके कार्यों का मूल्यांकन कर उन्हें सम्मानित किया जाना समाज का दायित्व है। जिन्हें सम्मानित किया गया है उनका कृतित्व तो बंदनीय है ही, इस पुनीत दायित्व के निर्वहन के लिए सप्रे संग्रहालय भी बधाई का पात्र है।
यह कहना है माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी का। वे आज माधवराव सप्रे स्मृति समचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान में आयोजित सम्मान समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्य अकादमी के निदेशक डा. विकास दवे ने की। सेज विवि के कुलाधिपति संजीव अग्रवाल विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली विभूतियों को सम्मानित किया गया।
मुख्यअतिथि तिवारी ने संग्रहालय से अपने निजी जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा कि माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विवि मेरा ‘गुरुकुल’ है तो सप्रे संग्रहालय मेरा ‘आंगन’ रहा। यहां उपलब्ध सामग्री का उपयोग कर मैंने अपना ज्ञान और लेखन कला दोनों को ही निखारा है।
अध्यक्षीय आसंदी से बोलते हुए डॉ. विकास दवे ने कहा कि इस मंच से शिक्षा,ज्ञान परंपरा,पर्यावरण,पत्रकारिता आदि क्षेत्रों की प्रतिभाओं का सम्मानित किया गया है। यही वह क्षेत्र हैं जो समाज को प्रभावित करते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत ऐसा देश है जो ‘मन’ को पढऩे वालों को सिर-आंखों पर बैठाता है। यह सम्मान भी इसी परंपरा की एक कड़ी है।
विशिष्ट अतिथि संजीव अग्रवाल ने कहा कि सप्रे संग्रहालय ज्ञान का खजाना है। यहां संग्रहीत सामग्री का ‘डिजिटाइजेशन’ हो रहा है, इससे यह सामग्री आने वाली कई पीढिय़ों के लिए सुरक्षित हो गई है।

सनातन वैष्णव परंपरा के प्रतीक हैं गांधी…

कार्यक्रम में महात्मा गांधी सम्मान से विभूषित वेद मर्मज्ञ आचार्य प्रभुदयाल मिश्र ने ‘गांधीत्व एक सहयात्रा’ विषय पर वक्तव्य देते हुए कहा कि गांधी सनातन वैष्णव परंपरा की पहचान हैं। इस कार्य के लिए बापू को आदि शंकराचार्य, तुलसी और स्वामी दयानंद के समकक्ष रखा जाना चाहिए।
‘डा. हरिकृष्ण दत्त शिक्षा सम्मान’ से सम्मानित शिक्षाविद् डा. सरोज गुप्ता ने संस्कृत श्लोकों के माध्यम से लोक साहित्य और संस्कृति की महत्ता बताई। उन्होंने कहा कि इस सम्माान ने मेरा दायित्व बढ़ाया है। ईश्वर से प्रार्थना है कि मैं जीवन पर्यंत बुंदेली बोली की सेवा करती रहूं।

इनका हुआ सम्मान…

कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्येता आचार्य प्रभुदयाल मिश्र, भोपाल को ‘महात्मा गांधी सम्मान’ से विभूषित किया गया। शिक्षाविद डा. सरोज गुप्ता, सागर को ‘डा. हरिकृष्ण दत्त शिक्षा सम्मान’ से सम्मानित किया गया। ‘डा. लक्ष्मीनारायण गुप्त महाकौशल पत्रकारिता पुरस्कार’ जबलपुर के वरिष्ठ पत्रकार संजय साहू को प्रदान किया गया। इंदौर में शोध संदर्भ सामग्री के संचयन में तीन दशक से समर्पित कमलेश सेन, उद्घोषक संजय श्रीवास्तव तथा सुनील दुबे ‘वृक्षमित्र’ को ‘कर्मवीर सम्मान’ से सम्मानित किया गया। साथ ही वरिष्ठ पत्रकार दिनेश शुक्ल को उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए ‘रामेश्वर गुरु पुरस्कार’ दिया गया।

तपोनिष्ठ पं सुंदरलाल श्रीधर स्मृति राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के प्रतिभागी पुरस्कृत…

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी तपोनिष्ठ पं. सुंदरलाल श्रीधर की स्मृति में आयोजित राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के प्रतिभागियों को भी इस अवसर पर पुरस्कृत किया गया। इस वर्ष ‘आजादी के शताब्दी वर्ष की ओर बढ़ता देश: वर्तमान परिदृश्य अपेक्षित प्राथमिकताएं’ विषय पर निबंध प्रतियोगिता आयोजित की गई थी। प्रतियोगिता में प्रदेश भर से कुल 165 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। जिनमें से प्रथम तीन के अलावा तीन सांत्वाना पुरस्कार भी दिये गये। इनमें प्रथम – अक्षत पटेल,गाडरवारा,द्वितीय – शुभम सक्सेना,भोपाल तथा तीसरे स्थान पर
मंजू महेडिया,भोपाल रहीं। इसके अलावा
श्रुति दुबे,भोपाल, उमेश पंसारी,सीहोर तथा
महक हिरवे,भोपाल को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गये। पुरस्कार के तहत नगद राशि एवं प्रशस्ति पत्र दिये गये।

आरंभ में संग्रहालय की ओर से समिति के अध्यक्ष डॉ. शिवकुमार अवस्थी एवं विवेक श्रीधर ने अतिथियों का स्वागत किया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में डॉ रामबल्लभ आचार्य रचित भाषा गीत की प्रस्तुति की गई, जिसमें भाषाई सौहार्द केंद्रीय भाव में है।
संचालन सप्रे संग्रहालय के निदेशक अरविन्द श्रीधर ने किया तथा आभार प्रदर्शन डॉ. अल्पना गिरी ने किया।
कार्यक्रम में इतिहासकार शंभुदयाल गुरु, रंगकर्मी राजीव वर्मा,संग्रहालय के संस्थापक निदेशक विजयदत्त श्रीधर के साथ ही जिन मनीषियों के नाम से सम्मान स्थापित हैं उनके परिजन एवं शहर के प्रबुद्धजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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