यदि विश्व के अलग-अलग देशों में लोगों से यह पूछा जाए कि वह अमेरिका की किस जगह अथवा पर्यटन स्थल के बारे में जानते हैं, तो निश्चित रूप से ‘स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी’ का नाम लेने वालों की संख्या सबसे अधिक होगी।
स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी केवल अमेरिका के लिए ही नहीं,बल्कि समूचे विश्व में स्वतंत्रता और मानव गरिमा के प्रतीक के रूप में विख्यात है। संयुक्त राष्ट्र ने भले ही इसे 1984 में विश्व धरोहर घोषित किया हो,लेकिन दुनिया की नज़रों में अपने स्थापना काल से ही यह मूर्ति प्रेरणा का स्रोत रही है।
151 फीट ऊंची यह मूर्ति फ्रांस और अमेरिकी नागरिकों की मित्रता और सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है।
मूर्ति का विचार फ्रांस में जन्मा। वैचारिक कल्पना को अमली जामा पहनाया मूर्तिकार बार्थोल्डी ने। मूर्ति कई टुकड़ों (लगभग 350) में तैयार हुई,जिसे समुद्री मार्ग से अमेरिका भेजा गया।
एक तरफ फ्रांस में मूर्ति गढ़ी जा रही थी, तो दूसरी तरफ अमेरिका में इतनी विशाल मूर्ति को स्थापित करने के लिए आधार तैयार किया जा रहा था। यह जिम्मेदारी उठाई अमेरिका के आम नागरिकों ने। आधार तैयार करने के लिए आवश्यक धनराशि नागरिकों ने विभिन्न प्रयासों के माध्यम से जुटाई। आवश्यक धनराशि जुटाने के प्रयास सफल हुए,और लगभग डेढ़ सौ फीट ऊंचा मजबूत आधार बनकर तैयार हो गया।
आधार सहित 305 फीट ऊंचे इस स्मारक का उद्घाटन 28 अक्टूबर 1886 को संपन्न हुआ।
मूर्ति को कुछ इस तरह से गढ़ा गया है, कि वह समूचे विश्व में मानव स्वतंत्रता और न्याय का सर्वोच्च प्रतीक बन गई है।
एक हाथ में मशाल, दूसरे हाथ में अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस की तारीख लिखी हुई तख्ती,और पैरों के नजदीक पड़ी टूटी हुई जंजीर…यह सभी प्रतीक मानव मात्र की स्वतंत्रता के स्वाभाविक अधिकार की अभिव्यक्ति ही तो हैं।
स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी के नजदीक ही एक संग्रहालय है, जिसमें मूर्ति के विचार से लगाकर ऊसकी स्थापना तक का पूरा घटनाक्रम रोचक तरीके से प्रस्तुत किया गया है। संग्रहालय की तरफ से उपलब्ध कराया गया ऑडियो सिस्टम तथ्यों को समझने में मदद करता है। यह सिस्टम अंग्रेजी के अलावा विश्व की अन्य प्रमुख भाषाओं में भी उपलब्ध है।
संग्रहालय भ्रमण के दौरान एक तथ्य ऐसा भी सामने आया जो स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी की स्थापना के मुख्य उद्देश्य – ‘स्वतंत्रता,समानता और न्याय’ के मूलभाव से मेल नहीं खाता,और तत्कालीन अमेरिकी समाज और लोकतंत्र में मौजूद विरोधाभास को प्रकट करता है।
स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी रोमन देवी लिबर्टस से प्रेरित है, और यह प्रतिमा स्त्री स्वरूप में गढ़ी गई है।लेकिन ताज्जुब की बात है कि स्वतंत्रता,समानता और न्याय की प्रतीक इस प्रतिमा का जिस दिन उद्घाटन हुआ,उस दिन तक अमेरिका में महिलाओं को मताधिकार प्राप्त नहीं था। यही कारण था कि महिला मताधिकार की मांग करने वाले विभिन्न संगठनों ने प्रतिमा स्थापना को निरर्थक निरूपित करते हुए विरोध प्रदर्शन किए थे।
मूर्ति स्थापना के 34 साल बाद 1920 में अमेरिकी महिलाओं को मताधिकार प्राप्त हुआ।
कुछ भी हो, न्यूयॉर्क हार्बर में,हडसन की अथाह जलराशि के मध्य खड़ी यह प्रतिमा,स्वतंत्रता,
समानता और न्याय जैसे लोकतंत्र के महान उद्देश्यों के प्रतीक के रूप में,आज समूचे विश्व में प्रतिष्ठित है।
ज़रूरत इस बात की है कि स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी महज़ सर्वाधिक देखे जाने वाला स्मारक बनकर ना रह जाए,वरन प्रयास यह होना चाहिए कि यह स्थल विश्व के प्रत्येक नागरिक के दिल में लोकतांत्रिक मूल्यों की प्रेरणा के रूप में हमेशा-हमेशा के लिए जीवंत रहे।

*अरविन्द श्रीधर

