समय और समाज की नब्ज़ पकड़ सकता है पत्रकार
एक पत्रकार ही ऐसा व्यक्ति होता है जो अपनी पैनी नजर से समाज में खुद भी कुछ बन सकता है और दूसरे को भी कुछ बना सकता है। इसकी वजह जमीनी वास्तविकता तक पहुंचने की उसकी क्षमता होती है। समय और समाज की नब्ज पर पत्रकारों की ही पकड़ होती है। समाज के दीगर क्षेत्रों के लोग जो नहीं समझ पाते,उसे पत्रकार सहज ही समझ लेता है।
यह कहना है पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत का। वे गुरुवार को माधवराव सप्रे संग्रहालय में आयोजित ‘संवाद एवं अलंकरण समारोह’ में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार अभिलाष खांडेकर कर रहे थे। समारोह में वरिष्ठ पीढ़ी के तीन पत्रकारों को ‘हुक्मचंद नारद’ सम्मान से सम्मानित किया गया। इस दौरान सम्मानित पत्रकारों ने अपने पत्रकार जीवन के अनुभवों को भी साझा किया।
अपने उद्बोधन में श्री रावत ने आगे कहा कि अपने सेवाकाल में कलेक्टर, संचालक जनसंपर्क या मुख्य चुनाव आयुक्त जैसे पद संभालने के दौरान पत्रकारिता जगत के लोगों का साथ रहा। इस दौरान बहुत कुछ सीखा-समझा। उन्होंने जबलपुर नगर निगम चुनाव के दौरान पर्यवेक्षक के रूप में प्राप्त अनुभव को साझा करते हुए बताया कि उस चुनाव में महापौर पद पर जिस दल के प्रत्याशी को जीत मिली उस दल की परिषद गठित नहीं हो पाई। वहीं,थर्ड जेंडर के कुछ प्रत्याशियों को भी जीत मिली। इस स्थिति पर वरिष्ठ पत्रकार एनके सिंह ने जो विश्लेषण दिया उसमें बताया कि ‘जनता मन बना चुकी थी कि स्वच्छ छवि के प्रत्याशियों को ही मत देंगे। इसी का परिणाम यह निकला कि कुछ क्षेत्रों में राजनेताओं से ऊबकर ही किन्नरों को भी प्रतिनिधि चुना’। श्री रावत ने स्वीकारा की एक पर्यवेक्षक होने के नाते भी मैं इस हकीकत को समझ नहीं पाया था। यह एक पत्रकार की दृष्टि है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में अभिलाष खांडेकर ने कहा कि यह दौर तकनीक का दौर है, ऐसे समय में पत्रकारिता के सामने चुनौतियां भी बदलीं हैं। जमीनी सच्चाई को समझने वाला पत्रकार ही सफल पत्रकार हो सकता है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जनता पत्रकारों से ही स्वच्छ आचरण की उम्मीद करती है, हालांकि बदलते दौर में पत्रकारों के सामने कई तरह के दूसरे दबाब भी हैं, इससे मीडिया का प्रभाव भी कम हुआ है। उन्होंने कहा कि इस तरह के सम्मान समारोह जहां सम्मानित पत्रकारों में दायित्वबोध जगाते हैं तथा नए पत्रकारों को प्रेरणा भी देते हैं।
इसके पूर्व संग्रहालय के संस्थापक निदेशक विजयदत्त श्रीधर ने स्वागत वक्तव्य तथा आयोजन के उद्येश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पत्रकारों के सम्मान के बहाने हम उनके अनुभवों को जानें-समझें।उनकी इस यात्रा से परीचित हो सकें।
‘हुक्मचंद नारद’ का परिचय देते हुए बताया कि वे मप्र के पहले वेतनभोगी पत्रकार थे। वे अपने कार्यों के बल पर संस्कारधानी जबलपुर की पहचान बने थे। इसके साथ ही उन्होंने सम्मानित तीनों पत्रकारों का परिचय देेते हुए कहा कि ऐसी विभूतियों को सम्मानित कर समाज भी गौरव का अनुभव करता है। आरंभ में संग्रहालय के अध्यक्ष डॉ. शिवकुमार अवस्थी ने अतिथियों का स्वागत किया।

कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार एन. के. सिंह, चंद्रकांत नायडू तथा राजेन्द्र हरदेनिया को ‘हुक्मचंद नारद सम्मान’ से सम्मानित किया गया। सम्मान के तहत शॉल,श्रीफल और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।
सम्मान के बाद अनुभव साझा करते हुए वरिष्ठ पत्रकार एनके सिंह ने सक्रिय पत्रकारिता के दौरान की गई रिपोर्टिंग के संस्मरण सुनाये। उन्होंने बताया कि जब वर्ष 1984 में भोपाल में गैस हादसा हुआ था, उसके दूसरे दिन पूरे शहर में घूम-घूम कर रिपोर्टिंग की। तब वहां का दृश्य इतना ह्दय विदारक था कि शाम को जब खबर लिख रहा था तो हर शब्द पर मेरे आंसू टपक रहे थे। यह मेरे जीवन का सबसे कसक भरा अनुभव रहा। इसी तरह रायसेन में बंधुआ मजदूरों पर की स्टोरी के बाद उन मजदूरों को छोड़ दिया गया। इस स्टोरी ने बहुत कुछ सिखलाया भी।

वरिष्ठ पत्रकार चंद्रकांत नायडू ने अनुभव सुनाते हुए बताया कि मैं खेलों का शौकीन था।खेलों की खबरें सबसे पहले पढ़ता था। लेकिन कभी सोचा नहीं था कि इन खबरों को लिखूंगा भी। लेकिन एक बार शहर के प्रमुख अंगरेजी अखबार में कुछ युवाओं को लिखने के लिए बुलाया गया तब एक प्राध्यापक के कहने पर वहां पहुंचा और मुझे काम दे दिया गया। इस तरह अनायास ही पत्रकारिता में आ गया। फिर कुछ समय बाद वरिष्ठों की सलाह पर धीरे-धीरे राजनीतिक रिपोर्टिंग की तरफ चला गया।
इसी क्रम में पत्रकार राजेन्द्र हरदेनिया ने बताया कि इंजिनियरिंग की शिक्षा प्राप्त करने के बाद विज्ञान के क्षेत्र में काम करने वाली नर्मदापुरम की संस्था ‘किशोर भारती’ से जुड़ गया। इस दौरान ही पत्रकार एनके सिंह जी के संपर्क में आया और उन्होंने नईदुनिया से जोड़ दिया। नईदुनिया ने मुझसे कई संवेदनशील मामलों पर जमीनी रिपोर्टिंग करवाई। इस दौरान नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव में हुए फर्जी एनकाउंटर की सच्चाई समाने लाई जिस पर विधानसभा में भी हंगामा हुआ था। इसी तरह पिपरिया में सडक़ निर्माण के दौरान एक बाल श्रमिक के डामर से झुलस जाने की घटना सामने लाई थी जिससे उस परिवार को मुआवजा मिला था। इस तरह के कार्यों से आत्मिक संतोष की प्राप्ति हुई।

सप्रे संग्रहालय के प्रयासों का महत्व प्रतिपादित करते हुए ओपी रावत ने कहा कि सप्रे संग्रहालय की खुशबू देश के बाहर भी महसूस की जाने लगी है। यहां जिस तरह से सामग्री का‘डिजिटाइजेशन’
हुआ उसकी गूंज यूके तक में सुनाई दी है। उन्होंने बताया कि वहां के एक मित्र ने इस संग्रहालय के बारे में जानकारी मांगी और कहा कि ऐसा कार्य हमारे यहां भी नहीं हुआ। इस दौरान उन्होंने संग्रहालय की स्थापना से लेकर आज तक के अपने जुड़ाव को भी साझा किया।
कार्यक्रम का संचालन और आभार प्रदर्शन पत्रकार अजय बोकिल ने किया।

- दीपक पगारे

