गाडरवारा पुस्तकालय में ‘नवजीवन’ के 100 साल

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नरसिंहपुर जिला अपने सांस्कृतिक वैभव और विद्यानुराग के लिए जाना जाता रहा है,और जिले का गाडरवारा नगर परंपरागत रूप से कला और संस्कृति के क्षेत्र में नवाचारों की अगुवाई करता रहा है।
इन नवाचारों के स्मारक के रूप में गाडरवारा नगर का सार्वजनिक पुस्तकालय विशिष्ट स्थान रखता है,जो 112 साल पुराना है।

इस पुस्तकालय में महात्मा गांधी, पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा निकाले गए अखबार धरोहर की तरह संजोए गए हैं, जो आजादी की लड़ाई के वक्त के आंदोलन , सत्याग्रह और जनजागरण के दौर से पाठकों को रू- ब – रू करा रहे हैं।

महात्मा गांधी द्वारा निकाले गए एक प्रमुख अखबार ‘नवजीवन’ के पचासों अंकों को पुस्तकालय में संजोए हुए आज 100 साल हो पूरे रहे हैं। नवजीवन के 7 जनवरी 1926 के बाद प्रकाशित कई अंक पुस्तकालय में सुरक्षित हैं। इसी तरह ‘नवजीवन’,’हरिजन’ ,’यंग इंडिया’,मदन मोहन मालवीय के ‘सनातन सारथी’ आदि अखबारों का बड़ा संग्रहण इस पुस्तकालय में अमूल्य निधि के रूप में संरक्षित है।

करीब 112 साल पहले सन 1914 में बाल गंगाधर लोकमान्य तिलक के आह्वान पर गाडरवारा के समाजसेवियों और स्वतंत्रता की लड़ाई में अपना सर्वस्व झोंक देने वालों की मंशा रखने वाले लोगों ने ‘तिलक पुस्तकालय’ के नाम से एक संस्था स्थापित की।
आज इस पुस्तकालय में विभिन्न विषयों की लगभग 25000 पुस्तकें उपलब्ध हैं।
संग्रह में कई दुर्लभ पुस्तके हैं।कबीर बीजक की मुख्य पांडुलिपि है तो महात्मा गांधी के अखबार हरिजन, नवजीवन समेत पंडित मदन मोहन मालवीय के सनातन सारथी और उनके कई अखबारों का दुर्लभ संग्रह है ।
चतुरसेन शास्त्री समेत मुंशी प्रेमचंद की कई दुर्लभ पांडुलिपियां ,उनकी लिखी पुस्तकें, महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला,पंडित भवानी प्रसाद मिश्र समेत कई नामचीन लेखकों और साहित्यकारों की कृतियां यहां की धरोहर हैं ।
इस ऐतिहासिक पुस्तकालय में प्रसिद्ध दार्शनिक चंद्र मोहन जैन जो बाद में ओशो के रूप में विख्यात हुए,उन्होंने 1944 से 1951 तक अनेक विषयों की पुस्तकों का यहां पर अध्ययन किया था। । अपने द्वारा पढ़ी गई निजी पुस्तकें भी उन्होंने हस्ताक्षर करके पुस्तकालय को दान में दी है । उनके द्वारा हस्ताक्षरित करीब 250 से अधिक पुस्तकें यहां पर हैं। पुस्तकालय के उपस्थिति रजिस्टर में ओशो के हस्ताक्षर आज भी देखे जा सकते हैं।
महादेवी वर्मा के हस्ताक्षर वाली दीपशिखा भी यहां लोगों का ध्यान बरबस अपनी तरफ खींच लेती है ।

*डॉ. बृजेश शर्मा

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