अमेरिका टूर डायरी -14 : नए साल का जश्न और ‘मुंबई दरबार’

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यह महज इत्तेफाक था कि 2025 के आखिरी सप्ताह में हम परिवार सहित मियामी में थे,जहां विश्व भर के पर्यटक नव वर्ष के आयोजनों में शामिल होने के लिए आते हैं। जाहिर है हर तरफ भीड़-भाड़ थी।हर कोई नव वर्ष के स्वागत के लिए उत्साहित था।और मियामी शहर भी अपनी ख्याति के अनुरूप खुद को सजा संवार रहा था।

हम लोग ओसियन ड्राइव के एक होटल में रुके हुए हुए थे। इसके ठीक सामने साउथ बीच है,जहां नववर्ष के स्वागत में भव्य समारोह की तैयारियां चल रही थीं।
ओसियन ड्राइव वैसे तो साल भर ही पर्यटकों से गुलजार रहता है,लेकिन इस समय तो ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे दुनिया की सारी विविधता ही यहां सिमट आई हो।

नव वर्ष के स्वागत में एक और समारोह बे फ्रंट पार्क में आयोजित होने वाला था,जिसके बारे में बताया गया कि लाखों लोग यहां आयोजित होने वाले समारोह में शामिल होते हैं।

इस तरह के आयोजनों के बारे में अब तक जो सुन रखा था उसके चलते यह तय किया गया कि हम अपने होटल के टेरेस से ही आतिशबाजी का आनंद लेंगे। भीड़-भाड़ में नहीं जाएंगे।
वैसे भी अधिकांश भारतीय इष्ट मित्रों को बधाई देकर अथवा देव दर्शन करके ही नववर्ष का स्वागत करते हैं। इसे एक तरह से पश्चिमी त्यौहार का भारतीयकरण कहा जा सकता है।

31 दिसंबर को दिनभर हमलोग प्रायः कोकोनट ग्रोव इलाके में भटकते रहे,जो मियामी की सबसे पुरानी बस्ती है। कोकोनट ग्रोव अपनी ऐतिहासिक विरासत,कलात्मक स्थापत्य,समृद्ध बाजार और रेस्टोरेंट की विस्तृत श्रृंखला के लिए विख्यात है।

मेरीलैंड,जहां हम लोग रुके हुए थेय, वहां तो अपनी खान-पान की आदतों के
अनुसार चौके की व्यवस्था जुटा ली गई थी, लेकिन जब हम लोग बाहर निकलते थे तब बड़ी समस्या आती थी,क्योंकि अंडा यहां वेजीटेरियन आहार में गिना जाता है। और प्रायः हर व्यंजन में अंडा अथवा मांस होता ही है। एक और विकल्प होता है वीगन फूड का,लेकिन इसमें प्रायः सलाद की ही प्रमुखता होती है। ऐसे में हमारे पास चयन के लिए विकल्प बहुत कम हो जाते थे,और जैसे-तैसे काम चलाना पड़ता था।

भारतीयों के बारे में प्रसिद्ध है कि हम अपने देश में तो कॉन्टिनेंटल रेस्टोरेंट खोजते हैं,और जब विदेश भ्रमण पर जाते हैं तो वहां भारतीय रेस्टोरेंट की तलाश करते हैं।
और जब बिना तलाशे ही भारतीय रेस्टोरेंट मिल जाए,तो क्या कहने!
कोकोनट ग्रोव में भटकने का एक फायदा यह हुआ कि ठीक दोपहर भोजन के समय एक भारतीय रेस्टोरेंट ‘मुंबई दरबार’ अनायास ही हमारी आंखों के सामने था।

एक बार तो मन में आया कि कोकोनट ग्रोव पर मौजूद लैटिन रेस्टोरेंट की विस्तृत श्रृंखला के बीच कुछ ऐसा ट्राई किया जाए जो नया भी हो और हमारे लिए मुफीद भी,लेकिन यह सोच हमारे ऊपर अधिक देर तक हावी नहीं रह सकी।
फिर वही हुआ जिसे हमारी कमजोरी कहा जाता है। हमने दाल,चावल,सब्जी,रोटी,दही,पापड़,
अचार,चटनी का भरपूर आनंद लिया। मीनू में तो समोसा,कचोरी,जलेबी और गुलाब जामुन जैसे व्यंजन भी दर्ज थे,लेकिन इतना सब कुछ एक साथ तो नहीं खाया जा सकता ना।

पता नहीं हम भारतीयों के संस्कारों में यह बात कहां से प्रवेश कर गई है कि हम विदेशियों को अपने त्योहार,खान-पान अथवा प्रथाओं को अपनाते हुए देखकर गौरव भाव से भर जाते हैं। इसका एहसास हमें तब हुआ जब हमने मुंबई दरबार रेस्टोरेंट में अपने आसपास अनेक गैर भारतीयों को भारतीय भोजन का आनंद लेते हुए देखा।

शाम होते होते हम लोग फिर अपने ठिकाने ओसियन ड्राइव पर थे,जहां अच्छी खासी चहल-पहल बढ़ चुकी थी। आते समय बे फ्रंट पार्क पर उमड़ते हुए जनसैलाब को देखकर लगा,कि जब शाम 6 बजे ही भीड़-भाड़ की यह स्थिति है,तो रात्रि 12 बजे क्या स्थिति होगी?
एक बार फिर यह निश्चय दोहराया गया कि नव वर्ष के स्वागत के इस उत्साही माहौल में हम अपनी उपस्थिति होटल की बालकनी से ही दर्ज कराएंगे।

रात के 10 बजे तक हम अपने इस निश्चय पर कायम रहे। लेकिन मन की चंचलता कब हमें अपने निश्चय पर अडिग रहने देती है। और फिर यह कोई ऐसा निश्चय तो था नहीं जिससे डिगने पर कोई बहुत बड़ा नुकसान होने वाला हो। रही बात भीड़-भाड़ की, तो असुविधा की स्थिति में वापस होटल लौटने का विकल्प तो था ही।

सबसे वाजिब तर्क रखा बिटिया ने – ‘जिंदगी में पहली बार विदेश भ्रमण का योग बना है। यह भी इत्तेफाक है कि नववर्ष की पूर्व संध्या पर हम मियामी जैसे विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पर हैं। इसके बाद पता नहीं यह संयोग बनेगा अथवा नहीं। फिर हमें कुछ विशेष श्रम भी नहीं करना है। हम उस विश्व प्रसिद्ध ओसियन ड्राइव पर रुके हुए हैं, जहां नववर्ष के स्वागत में भव्य आतिशबाजी होने वाली है, और जिसे देखने के लिए दुनिया भर से पर्यटक आते हैं। बस,हमें कमरे से बाहर भर निकलना है। एक बार देखें तो सही,लोग कितने उमंग और उत्साह से नववर्ष का स्वागत करते हैं। हो सकता है,आप लोगों के मन में पश्चिमी जगत और नव वर्ष उत्सव को लेकर जो धारणाएं बनी हुई हैं, उनमें कुछ परिमार्जन हो जाए।,’

विमर्श के क्रम में मन ही मन एक और मंथन चल रहा था,कि अभी कुछ ही घंटों पहले जब हम अलग-अलग देशों के नागरिकों को भारतीय भोजन का आनंद लेते हुए देखकर भारतीय पाक कला की लोकप्रियता के प्रति गौरव का अनुभव कर रहे थे,तो हमारी भी जिम्मेदारी बनती है कि हम पश्चिमी संस्कृति के सबसे बड़े और लोकप्रिय उत्सव में शामिल होकर उसके प्रति अपनापन प्रकट करें। एक-दूसरे की संस्कृति और परम्पराओं के प्रति आदरभाव ही तो विश्व बंधुत्व का मूल आधार है।

अंततः विचार विनिमय का दौर समाप्त हुआ और हम निकल पड़े ओसियन ड्राइव की भीड़ भरी सड़कों पर,जहां इमारतें,सड़कें और पार्क सब कुछ जगमग रोशनी में नहाया हुआ,उमंग और उत्साह में सराबोर नजर आ रहा था। कहीं लोग पश्चिमी संगीत पर थिरक रहे थे,तो कहीं अपने परिवार और मित्रों के साथ मौज-मस्ती में डूबे हुए थे। ओसियन ड्राइव के समस्त होटल और रेस्टोरेंट खचाखच भरे हुए थे। लोग पार्टियों का आनंद ले रहे थे।
धीरे-धीरे सभी उन विशाल इलेक्ट्रॉनिक घड़ियों के आसपास एकत्रित होने लगे,जिनमें गुजरते हुए साल का हर पल आने वाले साल की आमद को और नजदीक ला रहा था।
इंतजार की घड़ियां समाप्त हुईं। जैसे ही रात्रि के 12 बजे,आसमान रंग-बिरंगी आतिशबाजी से जगमगा उठा। बधाईयों और शुभकामनाओं का दौर चला,जिसमें जरूरी नहीं था कि शुभेच्छा का आदान-प्रदान करने वाले एक दूसरे के परिचित ही हों।
हमें भी बधाइयां मिली और स्वाभाविक रूप से हमने भी हर किसी के प्रति शुभकामनाएं व्यक्त कीं।

इस पूरे प्रकरण में जिस बात ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया,वह था लोगों का व्यवहार और आचरण। हजारों हजार लोग,लेकिन कोई अव्यवस्था नहीं!कोई धक्का मुक्की नहीं:सड़कों और आयोजन स्थल पर कचरे का नामोनिशान नहीं। हर कोई मौज मस्ती में डूबा हुआ,लेकिन एक-दूसरे की सुख-सुविधा के प्रति पूर्णतः सचेत।

अब रात्रि के एक-डेढ़ बजे का समय हो चला था,अतः हम भी अपनी होटल की ओर चल पड़े। लौटते समय हम आपस में यही बात कर रहे थे, कि भले ही पश्चिमी जगत की पहचान उन्मुक्त जीवन शैली के हिमायती की हो,लेकिन एक समाज के रूप में वह अनुशासित व्यक्तिगत आचरण का उदाहरण भी प्रस्तुत करता है।

*अरविन्द श्रीधर

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