शहीद दिवस के अवसर पर गांधी भवन,भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को शिद्दत के साथ याद किया गया। वक्ताओं ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि गांधी की प्रासंगिकता न केवल सर्वकालिक है,अपितु समय के साथ और भी प्रासंगिक होती जा रही है।
मुख्य वक्तव्य रखते हुए गांधी विचारक और लेखक पराग मांदले ने कहा कि जब हम सोचते हैं कि आज गांधी की हमें क्यों जरूरत है,तो हमें समझ आता है कि गांधी ने हमें वह सब दिया था जिस तरीके के भारत को हम बनाना चाहते हैं; लेकिन हमने गांधी को ना पकड़कर गांधी की लकीर को पकड़ लिया,जिस कारण हम समस्याओं से घिर गए।
गांधी कोई राजनेता नहीं,बल्कि आध्यात्मिक नेता थे। गांधी का कहना है कि यदि आपके धर्म के रास्ते में प्रेम नहीं है तो आप उस ईश्वर तक कभी नहीं पहुंच पाएंगे। गांधी के रास्ते में प्रेम है इसलिए उनके आदर्श केवल आदर्श नहीं बल्कि व्यावहारिक भी है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व आयकर आयुक्त डॉ आर के पालीवाल ने कहा कि पूरी दुनिया आज गांधी को खोज रही है यही गांधी की प्रासंगिकता है। उन्होंने कहा कि गांधी का विचार केवल भाषणों तक सीमित न रहकर, बल्कि शासन, प्रशासन और समाज के व्यवहार में उतरना चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पद्मश्री श्री विजय दत्त श्रीधर ने कहा कि चाहे जितना समय बीतता जाए, गांधी कभी पुराने होने वाले नहीं हैं। उन्होंने गांधी जी के मध्य प्रदेश में हरिजन यात्रा के प्रसंगों को साझा करते हुए कहा कि समाज ने उन्हें लोक देवता बनाया,और यह संभव हुआ गांधी जी की कथनी और करनी में एकरूपता की वजह से।
उन्होंने कहा कि गांधी किसी व्यक्ति या मूर्ति का नाम नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाली नैतिक प्रक्रिया हैं। उन्होंने कहा कि आज राजनीति, समाज और सार्वजनिक जीवन में नैतिक साहस का संकट है,और गांधी हमें सत्ता नहीं, बल्कि सत्य के पक्ष में खड़े होने की प्रेरणा देते हैं।
न्यास के कोषाध्यक्ष श्री राजेश बादल ने स्वागत उद्बोधन रखते हुए कहा कि मुझे गांधी के आईने में केवल सच दिखाई देता है और दुनिया में केवल सच को याद किया जाता है। अतीत में यदि हमें सच बोलने वाला कोई याद आता है तो वह राजा हरिश्चंद्र हैं,और वर्तमान में हम किसी को देखते हैं तो वह महात्मा गांधी हैं।
इस अवसर पर वरिष्ठ गांधीवादी विचारक श्री कनक तिवारी की पुस्तक “गांधी के आईने” का लोकार्पण किया गया।
पुस्तक पर चर्चा करते हुए वरिष्ठ पत्रकार डॉ राकेश पाठक ने कहा कि मानव इतिहास का ऐसा कोई कालखंड नहीं रहा जब सच बोलने वाले को खतरा न रहा हो,लेकिन आज यह खतरा कुछ ज्यादा ही है और पूरी मानवता इस समय हिंसा से प्रताड़ित है।ऐसे समय में हमें बापू ही याद आते हैं, और एकमात्र रास्ता भी उनके जीवन से हमें मिलता है।
डॉ सुधीर सक्सेना ने कहा कि यदि हमें आज गांधी की जरूरत के बारे में समझना है तो इस किताब को पढ़ना होगा।
इस अवसर पर गांधी भवन न्यास द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के पुरस्कारों का वितरण भी किया गया।
गांधी भवन न्यास के सचिव श्री दयाराम नामदेव ने आभार प्रदर्शन किया।


सत्य और अहिंसा के पुजारी गांधी की शहादत हमें सीख देती है कि किसी व्यक्ति को मार देने से उसके विचारों का अंत नहीं होता है। आज पुरे विश्व में बढ़ रही हिंसा, मारकाट, अत्याचार और अनाचार के बीच गांधी ही एकमात्र उम्मीद की किरण नजर आते है। शहीद दिवस के पुण्य अवसर पर गांधी की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम के लिए सभी को हार्दिक बधाई।