मध्य प्रदेश के 27 उत्पादों को मिल चुका है जीआई टैग

karmveer By karmveer
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जी आई यानी ज्योग्राफिकल इंडिकेशन टैग (भौगोलिक संकेत)। यह किसी उत्पाद को खास जगह से जोड़ता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल अधिकृत लोग ही उस नाम या चिन्ह का उपयोग कर सकें। यह उत्पाद की प्रमाणिकता बनाए रखने में मददगार होता है। भारत में जीआई टैग ज्योग्राफिकल इंडिकेशंस रजिस्ट्री द्वारा दिया जाता है,जो कि वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में हैं।

वर्ष 2004 में दार्जिलिंग चाय को देश का पहला जीआई टैग मिला था। तब से यह सिलसिला लगातार जारी है।
हाल ही में मध्य प्रदेश के पांच उत्पादों को जीआई टैग मिला है। यह उत्पाद हैं बैतूल जिले की पारंपरिक भरेवा कला, खजुराहो का पत्थर शिल्प, छतरपुर का फर्नीचर, ग्वालियर का पत्थर शिल्प और ग्वालियर की ही पेपर मैश कलाकृतियां।
इन्हें मिलाकर प्रदेश के 27 उत्पादों को अब तक जीआई टैग मिल चुका है।
आईए,जानते हैं प्रदेश के उन उत्पादों के बारे में, जिन्हें अब तक जीआई टैग मिल चुका है ‌-
1- चंदेरी साड़ी और फेब्रिक -2005 में प्रदेश को मिला यह पहला गी टैग था।
2- महेश्वरी साड़ी और फैब्रिक-खरगोन जिले के इस उत्पाद को 2012 में जीआई टैग मिला।
3-बाघ प्रिंट-धार जिले की पारंपरिक हस्त ब्लॉक छपाई कला है, जिसमें प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल होता है। इसे 2008 में जीआई टैग मिला।
4-इंदौर के चमड़े के खिलौने-पर्यावरण अनुकूल रंग, टिकाऊ व पारंपरिक डिजाइन के हाथ से बने इन कलात्मक खिलौनों को 2008 में जीआई टैग मिला।
5-दतिया और टीकमगढ़ के बेल मेटल वेयर- पारंपरिक ढलाई के माध्यम से पीतल और कांसे की नक्काशीदार कलात्मक वस्तुओं से संबंधित इस उत्पाद को 2008 में जीआई टैग मिला।

6-उज्जैन का बटिक प्रिंट-यह मोम की छपाई वाली पारंपरिक कला है, जो अपने अंगूठे डिजाइनों के कारण लोकप्रिय है। से 2023 में जीआई टैग मिला।
7-जबलपुर पत्थर शिल्प-भेड़ाघाट का संगमरमर पत्थर शिल्प सुंदर कारीगरी के लिए प्रसिद्ध है। इसे 2023 में जीआई टैग प्राप्त हुआ।
8-गोंड पेंटिंग-डिंडोरी क्षेत्र की प्रसिद्ध जनजातीय चित्रकला। गोंड पेंटिंग्स को 2023 में जीआई टैग मिला।
9-वारासिवनी हैंडलूम साड़ी-बालाघाट की विशेष बुनाई वाली,सूती पारंपरिक बॉर्डर की साड़ियों को 2023 में जीआई टैग मिला।
10-ग्वालियर हस्तशिल्प कालीन-पारंपरिक डिजाइन के हाथ से बने यह कालीन बहुत आकर्षक होते हैं। ग्वालियर के इस पारंपरिक उत्पाद को 2023 में जीआई टैग मिला।
11-पन्ना का हीरा-अपनी उत्कृष्ट कटिंग और बेहतरीन चमक के लिए प्रसिद्ध पन्ना के हीरा को 2025 में जीआई टैग मिला।
12-छतरपुर खजुराहो स्टोन क्राफ्ट-मंदिर शैली की नक्काशी वाले इस स्टोन क्राफ्ट को 2025 में जीआई टैग मिला।
13-छतरपुर फर्नीचर-सागौन की लकड़ी पर पारंपरिक नक्काशीदार डिजाइन वाले छतरपुर फर्नीचर को 2025 में जीआई टैग मिला।
14-बैतूल का भरेवा मेटल क्राफ्ट-इस क्राफ्ट के तहत धातु को ढालकर जनजातीय पारंपरिक कलाकृतियां निर्मित की जाती हैं। इसे 2025 में जीआई टैग मिला।
15-ग्वालियर पत्थर शिल्प-यह शिल्प बलुआ पत्थर पर नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है,जिसका उपयोग स्थापत्य कार्यों में होता है। वर्ष 2025 में इसे जीआई टैग मिला।
16-ग्वालियर पेपर मैशे क्राफ्ट-रद्दी कागज, लुगदी,गोंद और मिट्टी के मिश्रण का उपयोग कर बनाई गई हल्की कलात्मक वस्तुओं को 2025 में जीआई टैग दिया गया।
17-डिंडोरी का लौह शिल्प-अगरिया जनजाति की पारंपरिक कला जिसमें जनजातीय शैली में लोहे की कलाकृतियां निर्मित की जाती हैं। इस उत्पाद को वर्ष 2023 में जीआई टैग मिला।
18-बालाघाट किन्नौर चावल-विशेष सुगंध और स्वाद के लिए प्रसिद्ध इस चावल को 2021 में जीआई टैग दिया गया।
19-रीवा का सुंदरजा आम-अत्यधिक मीठा,सुगंधित और बिना रेशे वाले इस आम को 2023 में जीआई टैग दिया गया।
20-शरबती गेहूं-सीहोर और विदिशा जिलें का शरबती गेहूं देशभर में पसंद किया जाता है। इसे 2023 में जीआई टैग दिया गया।
21-महोबा देशावरी पान-यह मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश का संयुक्त उत्पाद है,जो बड़े आकार की पत्ती और तीखे मीठे स्वाद के लिए प्रसिद्ध है। इस बस 2021 में जीआई टैग मिला।

22-नागपुर संतरा-यह छिंदवाड़ा और पांढुर्णा का संयुक्त उत्पाद माना जाता है,जिसे 2014 में जीआई टैग दिया गया।
23-झाबुआ कड़कनाथ मुर्गा-उच्च प्रोटीन युक्त इस मुर्गै का मांस काला होता है। इसे 2018 में जीआई टैग दिया गया।
24-रतलामी सेव-अपनी विशिष्ट रेसिपी और स्वाद के लिए प्रसिद्ध रतलामी सेव को 2015 में जीआई टैग मिला।
25-मुरैना गजक-यह तिल और गुड़ से बनी पारंपरिक मिठाई है,जिसे 2023 में जीआई टैग दिया गया।
26-कठिया गेहूं-मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र का यह उत्पाद सूजी और पास्ता के लिए उपयुक्त माना जाता है। इसे 2024 में जीआई टैग दिया गया
27-जावरा का रियावन लहसुन-लंबे समय की भंडारण क्षमता वाला यह लहसुन बड़े कंद, तीखे स्वाद और अत्यधिक सुगंध के लिए जाना जाता है। किसी वर्ष 2024 में जीआई टैग दिया गया।

इन 27 उत्पादों के अलावा प्रदेश के 38 अन्य उत्पाद जीआई टैग हासिल करने की लाइन में है।

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