आदिवासी बहुल धार–झाबुआ अंचल के लिए वह पल आखिर आ ही गया,जिसका इंतजार पिछले पांच दशकों से किया जा रहा था। बहुप्रतीक्षित इंदौर–दाहोद नई रेल लाइन परियोजना के तहत पीथमपुर से धार तक 38.26 किलोमीटर लंबे रेल ट्रैक का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। विगत दिनों इस मार्ग पर इंजन (टॉवर वेगन) का सफल ट्रायल भी संपन्न हुआ।
ट्रायल के दौरान इंजन ने 38.26 किलोमीटर की दूरी महज 54 मिनट में पूरी की, जबकि अधिकतम गति करीब 50 किलोमीटर प्रति घंटा रही। यह न केवल ट्रैक की गुणवत्ता का प्रमाण है, बल्कि उस सपने के साकार होने का संकेत भी है जिसे इस क्षेत्र के लोग वर्षों से संजोए हुए थे।
धार और आसपास के आदिवासी क्षेत्रों के लिए रेल सिर्फ एक परिवहन का साधन नहीं, बल्कि विकास, रोजगार और कनेक्टिविटी का माध्यम भी है। बुजुर्गों की पीढ़ियां जिस रेल की आस में थीं, आज वह सपना हकीकत में बदलता नजर आ रहा है। रेल लाइन बिछ जाने से ग्रामीण ऐसे प्रसन्नता व्यक्त कर रहे हैं,जैसे उनकी मनचाही मुराद पूरी हो गई हो।
पिछले कई दशकों से इस क्षेत्र के ग्रामीण आदिवासी रेल की चर्चा सिर्फ चुनावों के समय ही सुना करते थे। यदि कोई नेता सार्वजनिक कार्यक्रमों में रेल लाइन बिछाने की चर्चा करता था,लोग समझ जाते थे कि चुनाव आने वाले हैं।
और अब,जब ट्रैक का फाइनल परीक्षण हो रहा है, ग्रामीणों की खुशी स्वाभाविक है।

इस रेल लाइन के शुरू होते ही धार, झाबुआ और आसपास के आदिवासी इलाकों में विकास की रफ्तार तेज होगी।उद्योगों को नई ऊर्जा मिलेगी।
व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
लोगों को सस्ती और आसान यात्रा सुविधा मिलेगी। एक तरह से यह रेलवे लाइन आदिवासी अंचल की तस्वीर बदलने वाली सिद्ध होगी।
पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के अनुसार, इस रेलखंड पर विद्युतीकरण और सिग्नलिंग कार्य तेजी से जारी है। पीथमपुर, सागौर, गुणावद और धार स्टेशनों पर भवन, प्लेटफॉर्म और अन्य सुविधाओं का निर्माण भी अंतिम चरण में है।
टीही के पास बन रही टनल का काम भी लगभग पूरा हो चुका है, जो इस परियोजना का अहम हिस्सा है।
उम्मीद की जानी चाहिए कि इंदौर-दाहोद रेल लाइन का शेष काम भी जल्दी पूरा होगा,और क्षेत्र की जनता को रेलगाड़ी के रूप में सुगम यातायात की सुविधा मिल सकेगी।

*प्रेम विजय पाटिल
(लेखक पत्रकार हैं,और विगत कई वर्षों से धार- झाबुआ अंचल की समस्याओं और संस्कृति के बारे में लिख रहे हैं।)


विकास की ओर अग्रसर धार जिले में परिवहन की व्यवस्था को पटरी पर लाने का महनीय कार्य सबके अथक प्रयास से पूर्ण हो पाया है। यह आदिवासी व पिछड़े अंचल की बदलती नईदुनिया है। प्रेम भाई जैसे विचारक व लेखक तथा पत्रकार ने निरन्तर रेल विषय को जीवंत बनाए रखा। प्रेम भाई जैसे पत्रकार साथियों का यह प्रयास भी अनुकरणीय व उल्लेखनीय है। कर्मवीर होने का यह सरल सहज उदाहरण है। 💐💐