दादा माखनलाल चतुर्वेदी के समकालीन महापुरुषों द्वारा दादा के प्रति व्यक्त उद्गार…
▪️माखन सा मन मृदुल तुम्हारा
मिश्री-से हैं वचन रसाल।
स्निग्ध मधुर निज दान कर्मकर
जियो सदा माई के लाल।
लो पालागन भी,असीस भी
लाभ तुम ही को है मोटा।
सब विध बड़ा बनाकर विधि ने
बना दिया वय मैं छोटा।
दादा के काव्य गुरु राष्ट्रकवि दद्दा मैथिलीशरण गुप्त का स्नेहाशीष.
▪️हम सब लोग बात करते हैं,बोलना तो माखनलाल जी ही जानते हैं।
▪️मैं बाबई जैसे छोटे स्थान पर इसलिए जा रहा हूं क्योंकि वह माखनलाल जी का जन्म स्थान है। जिस भूमि ने माखनलाल जी को जन्म दिया है, उसी भूमि को मैं सम्मान देना चाहता हूं ।
महात्मा गांधी (7 दिसंबर 1933)
▪️पिछले 14 वर्षों से ‘कर्मवीर’ ने राष्ट्रीय महासभा के झंडे को ऊंचा रखा है और प्रति सप्ताह हमारे देशवासियों को प्रेरणात्मक संदेशों से अनुप्रेरित करता रहा है। मेरी यह एकांत आशा और प्रार्थना है कि इस पत्र द्वारा हमारी मातृभूमि की लगातार सेवा होती रहे।
सुभाष चंद्र बोस (17 फरवरी 1938)
▪️1920 के असहयोग आंदोलन में मध्य प्रदेश में केवल तीन ही व्यक्ति गिरफ्तार किए गए। पं. माखनलाल चतुर्वेदी,पं. सुंदरलाल और महात्मा भगवानदीन। सुंदरलाल जी प्रयाग से आए थे, भगवानदीन जी नागपुर के थे। महाकोशल के केवल माखनलाल जी को यह गौरव प्राप्त हुआ। सन 1930 के सत्याग्रह में समूचे मध्य प्रदेश में जो सबसे पहले पांच व्यक्ति गिरफ्तार हुए थे वह थे पं माखनलाल चतुर्वेदी, पं रविशंकर शुक्ल, पं द्वारका प्रसाद मिश्र, श्री विष्णु दयाल भार्गव और मैं।
सेठ गोविंद दास
▪️उनके लिखे को पढ़ते समय ऐसा मालूम होता था कि आदिशक्ति शब्दों के रूप में अवतरित हो रही है या गंगा स्वर्ग से उतर रही है। यह शैली हिंदी में ही नहीं, भारत की दूसरी भाषाओं में भी विरले ही लोगों को नसीब हुई। मुझे जैसे हजारों लोगों ने अपनी भाषा और लिखने की कला माखनलाल जी से ही सीखी।
फिराक गोरखपुरी
▪️एक पूरी पीढ़ी इस ज्योति केंद्र के आसपास एकत्र रही थी – बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’, सुभद्रा कुमारी चौहान, रमाशंकर,भवानी प्रसाद मिश्र,प्रभाकर माचवे,गजानन माधव मुक्तिबोध,वीरेंद्र जैन,शिवमंगल सिंह सुमन, धर्मवीर भारती। यही नहीं राष्ट्रीय सांस्कृतिक उन्वेष के प्रेरणास्रोत के रूप में माखनलाल जी का प्रभाव वृत्त सुदूर क्षेत्रों तक था… दिनकर,बेनीपुरी,सोहनलाल द्विवेदी तक। इस पीढ़ी में वे प्रतिभाएं भी थीं, जिन्होंने बाद में नई प्रवृत्ति की काव्य धारा का समारम्भ किया था।
गिरिजा कुमार माथुर

▪️ दादा के प्रति अपनी आदरांजलि व्यक्त करते हुए ‘कर्मवीर परंपरा’ के वाहक पद्मश्री विजय दत्त श्रीधर कहते हैं….
’20 वीं सदी के पूर्वार्द्ध में अनेक महापुरुषों ने राष्ट्रीय परिदृश्य पर अपने बहुआयामी व्यक्तित्व और कालजयी कृतित्व की छाप छोड़ी है। ऐसे महापुरुषों में दादा माखनलाल चतुर्वेदी का नाम बड़े आदरपूर्वक लिया जाता है। वे शुधी चिंतक,सुकवि और प्रखर पत्रकार होने के साथ-साथ स्वतंत्रता संग्राम के सेनापतियों में से एक थे,और सच्चे अर्थों में संपूर्ण मानव थे। उनकी मुकम्मल पहचान ‘एक भारतीय आत्मा’ के रूप में है जो सर्वथा सटीक भी है।’
विजय दत्त श्रीधर
संस्थापक, सप्रे संग्रहालय एवं शोध संस्थान, भोपाल

