2025 के अक्टूबर महीने में अफ़ग़ानिस्तान के विदेश मंत्री मौलवी अमीर ख़ान मुत्तकी की भारत यात्रा ने सिर्फ कूटनीतिक फॉर्मैलिटी नहीं, बल्कि क्षेत्रीय रणनीति, आर्थिक अवसर और राजनैतिक संदेशों का एक समुच्चय पेश किया है। यह उनकी 2021 में तालिबान सत्ता संभालने के बाद भारत की पहली उच्च-स्तरीय यात्रा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा दी गई अस्थायी यात्रा छूट ने इस संवाद को संभव बनाया। यह यात्रा दोनों देशों के लिए पुनरारंभ का प्रतीक है,जहाँ ना सिर्फ पुराने निवेशों को संरक्षित किया जाना है, बल्कि नए सहयोग मार्गों की भी खोजा जाना है।
भारत ने अफ़ग़ानिस्तान में पिछले दो दशकों में लगभग US$ 3 अरब से अधिक की सहायता और निवेश की है, जिसमें बिजली परियोजनाएँ, सड़कें, अस्पताल, शिक्षा, पारदर्शी लोकसंवाद संस्थाएँ शामिल हैं। माना जाता है कि लगभग 400-500 परियोजनाएँ भारत ने देश के 34 प्रांतों में पूरी की हैं, अथवा अभी निर्माणाधीन हैं। जैसे साल्मा (Salma) डैम, अफ़ग़ान पार्लियामेंट भवन, विभिन्न सिंचाई और जल प्रबंधन योजनाएँ और विद्युत आपूर्ति लाइनें प्रमुख हैं। ये सभी भारत द्वारा अफ़ग़ानिस्तान के पुनर्निर्माण और स्थायी विकास में किये गये ठोस निवेशों का प्रमाण हैं। इस पृष्ठभूमि में मुत्तकी की यात्रा इस आशा के साथ आई कि दोनों देश उन पहलुओं पर आगे बढ़ेंगे जिनमें सुरक्षा, शिक्षा, हवाई संपर्क, व्यापार और सांस्कृतिक एवं मानवीय सहयोग को बढ़ाया जा सके।
भारत अफगानिस्तान संबंधों में भारत की आशाएँ और प्राथमिकताएँ सुरक्षा,आतंकवाद और उससे संबंधित गतिविधियों के लिए भरोसेमंद
प्रतिबद्धताओं को लेकर हैं। भारत चाहता है कि दोनों देशों के बीच स्पष्ट सुरक्षा समझौते हों, आतंकवाद और उससे संबंधित गतिविधियों का सामना करने के लिए भरोसेमंद प्रतिबद्धताएँ हों। यही वजह है कि भारत ने जोर दिया कि अफ़ग़ानिस्तान यह सार्वजनिक गारंटी दे कि उसकी सरज़मीं का उपयोग किसी अन्य देश के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं होगा। इस प्रकार की गारंटी, सिर्फ शब्दों में नहीं, बल्कि व्यवहारिक स्तर पर लागू होनी चाहिए।
दूसरा महत्वपूर्ण विषय हवाई संपर्क और वाणिज्यिक मार्गों का पुनरुद्धार है। भारत-अफग़ानिस्तान के बीच अमृतसर–काबुल सीधी फ्लाइट की घोषणा एक बड़ा कदम है, खासकर व्यापारियों, यात्रियों, चिकित्सा सेतु (medical evacuation) और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए। इस तरह के संपर्क से सामानों विशेषकर कृषि उपज, ड्रायफ्रूट्स, मसाले और हस्तशिल्प आदि की आवाजाही सस्ती और सुगम हो सकती है। इसके अलावा, भारत के लिए यह महत्वपूर्ण है कि अफ़ग़ानिस्तान के उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग, निर्यात-मानदंड आदि में सुधार हो, जिससे वे अंतर्राष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बन सकें।
तीसरी उम्मीद है विकास सहायता और मानवीय क्षेत्र में व्यापक सहयोग की। स्वास्थ्य सुविधाओं, अस्पतालों, प्राथमिक शिक्षा, महिला शिक्षा, जल-स्वच्छता और बुनियादी ढाँचे की परियोजनाएँ भारत लंबे समय से अफ़ग़ानिस्तान में कर रहा है। मुत्तकी की यात्रा ने इस क्षेत्र में नया विस्तार करने, योजनाएँ तेज़ी से लागू करने और सहायता वितरण की पारदर्शिता सुनिश्चित करने की उम्मीद जगाई है।
भारत कि यह भी आकांक्षा है कि वह अफ़ग़ानिस्तान के माध्यम से मध्य एशिया और पश्चिम एशिया के बाजारों से अच्छी तरह जुड़ सके। पारगमन मार्गों, विशेषकर ईरान-भारत-अफ़ग़ानिस्तान (Chabahar) और सड़क-नदी-हवाई मार्गों के पुनरुत्थान से भारत के व्यापार-लॉजिस्टिक खाद्य श्रृंखलाएं, ऊर्जा मार्ग, कच्चे माल की आपूर्ति और औद्योगिक इनपुट्स की प्राप्ति को एक नया आयाम मिलेगा।
भारत यह भी चाहता है कि अफ़ग़ानिस्तान में सत्ताधारी व्यवस्था में कुछ सुधार हो, विशेषकर महिला अधिकारों, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, न्याय व प्रशासन के तंत्र में पारदर्शिता, ताकि भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताओं का समाधान हो सके।
अफ़ग़ानिस्तान की अपेक्षाएँ और हित
अफ़ग़ानिस्तान, विशेष रूप से तालिबान शासन के अधीन, आज वैकल्पिक साझेदारों की तलाश में है। अफ़ग़ान सरकार के लिए इस यात्रा का एक बड़ा लाभ अंतरराष्ट्रीय और राजनयिक मान्यता के अवसरों की बढ़ोत्तरी के रूप में भी देखा जा रहा है। भारत जैसी क्षेत्रीय शक्ति देश से संवाद और सहयोग उसकी वैधता को बढ़ायेगा, विशेषकर आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक मोर्चों पर।
विकास परियोजनाएँ अफ़ग़ानिस्तान के लिए जीवन स्तर सुधारने का माध्यम हैं। बिजली की कमी, पानी की आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवाएँ, प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा, सड़क-सेतु निर्माण—इन सब क्षेत्रों में भारत की दक्षता और तकनीकी क्षमता महत्वपूर्ण है। पुनः हवाई संपर्क सुचारु होने से स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार, चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति में सुगमता तथा सामानों की डिलीवरी में सहजता आयेगी।
आर्थिक अवसरों की रिकवरी भी अफ़ग़ानिस्तान चाहता है। व्यापार बढ़ने, निर्यात-आयात के मार्ग खुलने से विदेशी मुद्रा की आपूर्ति में सुधार, स्थानीय उद्योगों को बाजार मिलेगा और आम लोगों को रोज़गार अवसर बनने की संभावना है। यदि अफ़ग़ान उत्पाद—साफ़्रॉन, ड्रायफ्रूट्स, फल-सब्जियाँ, हस्तशिल्प आदि—उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हों, तो उन्हें भारत तथा अन्य देशों के बाजारों में अच्छी मांग मिल सकती है।
मानव पूँजी विकास अफ़ग़ानिस्तान के लिए एक रणनीतिक आवश्यकता है। देश की युवा आबादी को शिक्षा-प्रशिक्षण, छात्रवृत्तियों, तकनीकी कौशल कार्यक्रमों की ज़रूरत है। जहाँ भारत की विशेष प्राविधिक एवं शैक्षणिक संस्थाएँ हैं, और दूरस्थ शिक्षा (e-scholarships) व ऑनलाइन अध्ययन-विकास योजनाएँ हैं, वे अफ़ग़ान युवाओं के जीवनमान उन्नत करने में सहायक हो सकती हैं। संस्कृति, धर्म और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा भी अफ़ग़ानिस्तान में अंदरूनी समरसता व विश्वास बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
भारत-अफ़ग़ानिस्तान के बीच क्या हुआ
मुत्तकी की यात्रा के दौरान एक संयुक्त घोषणा पत्र जारी हुआ, जिसमें दोनों पक्षों ने विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढाँचा, वाणिज्य एवं हवाई संपर्क के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया। भारत ने अफ़ग़ानिस्तान में अपनी तकनीकी मिशन को उच्च स्तरीय राजनयिक मिशन में परिवर्तित करने तथा अपने दूतावास को पुनः खोलने की घोषणा की। अफ़ग़ान पक्ष ने भी भारत में राजनयिक प्रतिनिधियों की नियुक्ति की जिम्मेदारी लेने का संकेत दिया। इस अंतराल में, अमृतसर-काबुल हवाई मार्ग को पुनः शुरू करने की घोषणा ने व्यापार, चिकित्सा और लोगों के आवागमन के नए अवसरों को जन्म दिया।
भारत ने यह बात दोहराई कि अफ़ग़ानिस्तान की सरज़मीं किसी अन्य देश के विरोधी कार्यों के लिए उपयोग न हो, और अफ़ग़ानिस्तान ने इसे स्वीकार किया। भारत के लिए यह सुरक्षा नीति के मोर्चे पर एक बड़ी उपलब्धि है। भारत की तरफ से पूर्व की परियोजनाओं की सुरक्षा और रख-रखाव की ज़िम्मेदारी पर जोर दिया गया जो भारत-अफ़ग़ान साझेदारी के प्रतीक रही हैं—जैसे पार्लियामेंट भवन, साल्मा डैम आदि।

रणनीतिक, राजनीतिक व छिपे संकेत
मुत्तकी की यात्रा प्रतीकात्मक है। यह दिखाती है कि भारत ने “प्रथम संसूचना / पूर्ण मान्यता” की स्थिति से हटकर “प्रायोगिक साझेदारी” की स्थिति अपना ली है, जिसमें भारत हस्तक्षेप करने के बजाय सहयोग की भूमिका निभाना चाहता है। यह दृष्टिकोण पाकिस्तान और अन्य पड़ोसी देशों को यह संदेश देता है कि अफ़ग़ानिस्तान केवल उनकी बाहरी नीति परियोजनाओं का हिस्सा नहीं रहेगा, बल्कि भारत के हित भी अब इस हिस्से में शामिल होंगे।
पर यह भी स्पष्ट है कि भारत अभी भी अपनी सीमा रेखाएँ तय करना चाहता है: महिलाओं की शिक्षा, न्यायपालिका का एक पारदर्शी एवं समावेशी तंत्र, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी कार्रवाई जैसे मुद्दों पर भारत स्पष्ट एवं प्रभावी कार्यवाही चाहता है।
चुनौतियाँ: राह आसान नहीं
अफ़ग़ानिस्तान का आंतरिक राजनीतिक परिदृश्य अभी अस्थिर है,न्यायपालिका और प्रशासन में पारदर्शिता की कमी है। महिलाओं की शिक्षा और सार्वजनिक जीवन में उनकी भागीदारी के मामलों में अभी बहुत विरोधिभास है,जो अंतरराष्ट्रीय समुदाय की राय में संवेदनशील मुद्दे हैं।
दूसरी चुनौती है सुरक्षा। भारत जो निवेश कर रहा है, उसका रख-रखाव, परियोजनाओं की सुरक्षा, कर्मचारियों की सुरक्षा, सामग्री की लॉजिस्टिक आदि को लेकर खतरे हैं। आतंकवादी हमले, आंतरिक विद्रोह या नियंत्रित-असंतुष्टि वाले इलाकों में आपदा या व्यवधान हो सकते हैं। ये जोखिम भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक दोनों ही तरह से महत्त्वपूर्ण हैं।
कैसे बन सकती है यह यात्रा एक ठोस दस्तावेज़ सफलता
यदि भारत-अफ़ग़ानिस्तान संबंधों को स्थायी और समर्थ बनाने का इरादा है, तो कुछ नीतिगत / कार्य-प्रणाली के कदम जरूरी होंगे। पहला, सुरक्षा एवं आतंकवाद-रोधी समझौते लिखित, न्यायिक और निगरानी योग्य हों। गुप्तचर सूचना साझा करने की प्रणाली, सीमाएँ पार करने वाले ट्रैफिक की निगरानी, संयुक्त प्रशिक्षण और कार्रवाई-प्रणाली बनें।
दूसरा, परियोजनाओं की प्राथमिकता होनी चाहिए उन क्षेत्रों की जो त्वरित लाभ दे सकें — स्वास्थ्य, पीने का पानी, प्राथमिक शिक्षा, सड़कें, बिजली आपूर्ति। छोटे-छोटे उच्च-प्रभाव वाले प्रोजेक्ट्स जनता के जीवन को तुरंत छू सकें। तीसरा, शिक्षा और मानव पूँजी पर ज़ोर दिया जाना चाहिए — छात्रवृत्तियाँ, ऑन-लाइन शिक्षा, प्रशिक्षण केंद्र, महिला शिक्षा केंद्र, अल्पसंख्यक धार्मिक व सांस्कृतिक संस्थाओं का संरक्षण। चौथा, व्यापारियों और उद्योगों को निर्यात-मानक, कस्टम्स प्रक्रिया, लौजिस्टिक सुविधाएँ मिलनी चाहिए, ताकि अफ़ग़ान उत्पाद विश्व-बाज़ार के लिए सक्षम हो सकें।
पाँचवा, पारदर्शिता, निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए। परियोजनाओं के लिए तीसरे पक्ष की ऑडिट, स्थानीय समुदाय की भागीदारी, दीर्घकालिक रख-रखाव की योजना, वित्तीय प्रवाह का सार्वजनिक लेखा-जोखा ये सभी जरूरी हैं। भारतीय और अफ़ग़ान दोनों स्तर पर प्रशासन एवं गैर-सरकारी संस्थाओं की भूमिका हो सकती है।
अफ़ग़ान विदेश मंत्री अमीर ख़ान मुत्तकी की यह यात्रा संकेत है कि भारत-अफ़ग़ानिस्तान संबंध अब एक नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं, जिसमें कट्टर राजनीतिक मतभेदों के बजाय साझा हित, सुरक्षा, विकास और मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता मिलेगी। यह यात्रा ऐसा मोड़ हो सकती है जहाँ भारत अपने पुराने निवेशों को सुरक्षित कर, नए आर्थिक अवसरों का दो-तरफ़ा लाभ उठाते हुए, क्षेत्रीय स्थिरता और विकास में एक बेहतर भूमिका निभा सकता है। अफ़ग़ानिस्तान के लिए यह अवसर है कि वह अपने नागरिकों को बेहतर जीवन प्रदान करे, अपनी अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करे, और अंतरराष्ट्रीय संवाद में अपने पैर मजबूत कर सके।
लेकिन यह सब तब संभव है जब प्रत्याशाएँ व्यावहारिक हों, प्रतिबद्धताएँ सच्ची हों, और राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ-साथ प्रशासनिक क्षमता मौजूद हो।
भारत के नीति-निर्माता इस संतुलन को खूब समझते हैं—वे यह जानते हैं कि मानवीय आदर्श और रणनीतिक हित दोनों महत्वपूर्ण हैं।
यदि यदि दोनों पक्ष इसे समझ सके तो यह मुलाकात इतिहास में न केवल एक कूटनीतिक दौरे के रूप में बल्कि पुनर्निर्माण, विश्वास और साझेदारी की शुरुआत के रूप में याद भी की जाएगी।
-सोमी वसीम ज़ैदी
(लेखिका अंतरराष्ट्रीय मामलों पर नजर रखती हैं। यहां व्यक्त विचार उनके व्यक्तिगत हैं।)

