अमेरिका टूर डायरी – 3

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राष्ट्रीय प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय
(National Museum of Natural History, Washington,DC)

वॉशिंगटन,डीसी में संग्रहालयों की भरमार है। 1846 में स्थापित स्मिथसोनियन संस्थान ही लगभग 21 से अधिक संग्रहालयों सहित अनेक गैलरी और अनुसंधान केंद्रों का संचालन करता है।इन संग्रहालयों में मानव जीवन के विकास से लगाकर तमाम कलाओं,संस्कृतियों एवं इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं से संबंधित जानकारी कलात्मक और आकर्षक तरीके से प्रदर्शित की गई है।प्रतिवर्ष लगभग 30 मिलियन पर्यटक इन संग्रहालयों का भ्रमण करते हैं। प्रायः सभी संग्रहालयों में पर्यटकों के लिए प्रवेश निःशुल्क है।

उल्लेखनीय तथ्य यह है कि स्मिथसोनियन संस्थान पब्लिक-प्राईवेट पार्टनरशिप का बेहतरीन नमूना है,जिसका वार्षिक बजट लगभग 1.25 बिलियन डॉलर है। बजट का एक बड़ा भाग शासकीय सहायता से आता है,जबकि प्राइवेट एवं कारपोरेट घराने भी अच्छी खासी मदद करते हैं।

संस्थान द्वारा संचालित संग्रहालयों में अमेरिकन हिस्ट्री म्यूजियम,नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम,
अफ्रीकन-अमेरिकन हिस्ट्री एंड कल्चर म्यूजियम,अमेरिकन-इंडियन म्यूजियम,एअर एंड स्पेस म्यूजियम,अफ्रीकन आर्ट म्यूजियम,एशियन आर्ट म्यूजियम आदि प्रमुख हैं।

वैसे तो सभी संग्रहालय एवं स्मारक अपने आपमें महत्वपूर्ण है, लेकिन राष्ट्रीय प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय की दीर्घाओं से गुजरना अपने आपमें एक रोमांचक अनुभव है।
संग्रहालय में जल,थल एवं नभ से संबंधित 140 मिलियन से अधिक प्रादर्श संरक्षित किए गए हैं,जो विस्मित भी करते हैं और रोमांचित भी।

1910 में दर्शकों के लिए खोला गया यह संग्रहालय इतना विशाल है कि इसमें संग्रहित अबूझ रहस्यों और आश्चर्यों को आप घंटों निहार सकते हैं।
मानव की प्रारंभिक अवस्था और उसका क्रमिक विकास, समुद्र की गहराइयों में छिपे रहस्य और समुद्री जीव जंतुओं का जीवन, सदियों पुराने जीवाश्म, वनस्पति एवं पृथ्वी तथा समुद्र में पाए जाने वाले विभिन्न खनिज तथा वेशकीमती रत्न…इस संग्रहालय में सब कुछ अपने आपको अभिव्यक्त करने के लिए आतुर दिखाई देते है।

यहां अफ्रीकी हाथी और डायनासोर के विशाल कंकाल प्रदर्शित हैं,तो छोटे-छोटे कीट पतंगों और रंग-बिरंगी तितलियों का संसार भी है। विशालकाय व्हेल सहित समुद्री जीवन के दुर्लभ नमूने भी यहां देखने को मिलते हैं। रत्न प्रदर्शनी की चकाचौंध घंटों दर्शकों को बांधे रखती है।

संग्रहालय की प्रत्येक दीर्घा इतने सुरुचिपूर्ण तरीके से सुसज्जित की गई है कि दर्शक पृथ्वी ग्रह के अबूझ रहस्यों का साक्षात्कार सहज ही कर लेता है। इस दृष्टि से इसे केवल संग्रहालय नहीं अपितु अपने अतीत से साक्षात्कार का अवसर कहा जाना कहीं अधिक उचित होगा।

संग्रहालय की रत्न दीर्घा में दो ऐसे बेशकीमती जेवरात देखने को मिले,जिनका संबंध भारत से है। एक तो बड़ौदा राजघराने की अंगूठी जिसमें पन्ना और हीरे जड़े हुए हैं; और दूसरा इंदौर राजघराने का कंठहार जिसमें जड़े पन्ना और हीरे राजघरानों के वैभवशाली अतीत की गवाही देते से प्रतीत होते हैं।

*अरविन्द श्रीधर

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