अमेरिका टूर डायरी की पांचवी कड़ी वाशिंगटन, डीसी के उन महत्वपूर्ण भवनों पर केंद्रित है, जो अमेरिका की पहचान हैं।
यू.एस. कैपिटल : अमेरिकी कांग्रेस (सीनेट और प्रतिनिधि सभा) का घर
यू. एस. कैपिटल भवन का निर्माण सन् 1793 में प्रारंभ हुआ था। संयुक्त राज्य अमेरिका की लोकतांत्रिक परंपराओं के प्रतीक के रूप में विश्वविख्यात यह भवन सन् 1800 से एक राष्ट्र के निर्माण की यात्रा का गवाह रहा है। 17 नवंबर सन् 1800 को निर्माणाधीन यू.एस.कैपिटल के उत्तरी भाग (नार्थ विंग) में अमेरिकी कांग्रेस का पहला सत्र आहूत किया गया था।
इसके पहले फिलाडेल्फिया से संसदीय कार्यवाही संचालित हो रही थी;जबकि 4 मार्च 1789 को यू. एस. कांग्रेस की पहली बैठक न्यूयॉर्क के फेडरल हाल में बुलाई गई थी।
अपनी स्थापना से लगाकर अब तक, लगभग दो शताब्दियों में एक राष्ट्र के रूप में जैसे-जैसे अमेरिका का विस्तार होता गया, वैसे-वैसे संसद भवन का भी विस्तार होता गया।


इस ऐतिहासिक इमारत के भ्रमण के दौरान दर्शकों को यू एस कैपिटल पर्यटक केंद्र द्वारा नियत गाइड के साथ ही रहना होता है। भ्रमण की शुरुआत संसद भवन पर केंद्रित एक परिचयात्मक फिल्म के साथ होती है। यहीं पर हेडफोन दे दिया जाता है, जो गाइड द्वारा दी जा रही जानकारी को सुनने में मददगार साबित होता है।
भवन की भव्यता को कलात्मक साज-सज्जा के माध्यम से पूर्णता प्रदान की गई है। छतों,सभागारों और बरामदों में ऐतिहासिक महत्व की घटनाओं को प्रदर्शित करती हुई पेंटिंग्स और मूर्तियां अमेरिकी इतिहास की कहानियां सुनाती हुई सी लगती हैं।

संसद भवन के केंद्र में स्थित रोटंडा (90 फीट व्यास और 100 फीट ऊंचा गोलाकार सभागार) का इस्तेमाल महत्वपूर्ण समारोहों के लिए किया जाता है। इस विशाल गोलाकार कक्ष की छत इतालवी- अमेरिकी कलाकार ब्रुमीडी के भित्तिचित्रों से अलंकृत है,जिन्हें तैयार करने में लगभग 25 वर्ष लगे।
दीवारों पर ऐतिहासिक घटनाक्रम से संबंधित पेंटिंग्स सजाई गई हैं, साथ ही अब्राहिम लिंकन सहित अन्य राष्ट्रपतियों की आदमकद प्रतिमाएं भी कक्ष में स्थापित की गई हैं,जो एक तरह से अमेरिकी राष्ट्र के निर्माण में उनके योगदान के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का प्रयास है।
16 जनवरी 1986 को मार्टिन लूथर किंग जूनियर की आवक्ष प्रतिमा भी यहां स्थापित कर दी गई।
संसद भवन के पहले तल पर स्थित बड़ा गोलाकार क्षेत्र, जिसे क्रिप्ट कहा जाता, में स्थापित 13 मूर्तियां मूल 13 कॉलोनियों का प्रतिनिधित्व करती हैं। यहीं पर मैग्नाकार्टा (महाधिकार पत्र)की प्रतिकृति भी प्रदर्शित की गई है, जिसमें दर्ज सिद्धांत अमेरिकी संविधान का प्रमुख आधार हैं। ब्रिटेन में तैयार की गई यह कलाकृति अमेरिकी स्वाधीनता के 200 वर्ष पूर्ण होने पर ब्रिटेन द्वारा भेंट की गई थी।


रोटंडा के दक्षिण में अर्धवृत्ताकार मूर्ति संग्रह कक्ष है। राष्ट्र के संघीय स्वरूप के प्रतीक इस कक्ष में 100 मूर्तियां प्रदर्शित की गई हैं। अमेरिका में 50 राज्य
हैं। प्रत्येक राज्य द्वारा 2 ऐसे लोगों की मूर्तियां मूर्ति संग्रह केंद्र में प्रदर्शित करने के लिए प्रदान की गई हैं,जो उस राज्य के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
मूर्ति संग्रह कक्ष की संकल्पना सचमुच प्रशंसनीय है। यह कक्ष देश के संघीय स्वरूप की सामूहिक उद्घोषणा है। कक्ष यह उद्घोषणा करता हुआ भी प्रतीत होता है कि राष्ट्र के निर्माण में हर राज्य की बराबर की सहभागिता है।
मूर्ति संग्रह कक्ष इस दृष्टि से भी ऐतिहासिक है क्योंकि 1807 से 1857 तक यहां पर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की बैठकें हुआ करती थीं।
सीनेट और प्रतिनिधि सदन की दर्शक दीर्घायें संसद भवन के पर्यटन में शामिल नहीं है। सत्र के दौरान प्रवेश पत्र प्राप्त कर एक निश्चित समयावधि में इनका अवलोकन किया जा सकता है।
व्हाइट हाउस : संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति का निवास
वाशिंगटन डीसी में स्थित व्हाइट हाउस, संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति का आधिकारिक निवास और कार्यालय है,जो भव्य,सर्वसुविधायुक्त और आधुनिकतम सुरक्षा उपायों से लैस है। रोमन और ग्रीक स्थापत्य से प्रभावित 18 एकड़ में फैले
इस भवन का निर्माण सन् 1800 में पूर्ण हुआ।

लेकिन इस छह मंजिला इमारत का सिर्फ इतना परिचय ही पर्याप्त नहीं है। दरअसल यह इमारत अमेरिकी सत्ता केंद्र का सर्वोच्च प्रतीक है,जहां लिए गए फैसले पूरे विश्व को प्रभावित करते हैं। अमेरिका के राजकीय अतिथियों का स्वागत भी यहीं किया जाता है।
अमेरिका का सर्वोच्च शक्ति केंद्र होने की वजह से यह परिसर कड़े सुरक्षा मांनकों के अधीन है,और बिना अनुमति के आम पर्यटक एक निश्चित दूरी से ही इसका अवलोकन कर सकते हैं। सक्षम अधिकारी द्वारा प्रवेश पत्र जारी करने के उपरांत आप भवन के उतने आंतरिक भाग का भ्रमण कर सकते हैं,जितना पर्यटकों के लिए निर्धारित है।
प्रवेश पत्र बनवाने के लिए अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य का अनुमोदन आवश्यक है।
इसके नामकरण के पीछे एक कहानी है। 1814 में ब्रिटिश फौज के हमले से भवन को नुकसान पहुंचा था। मरम्मत के बाद इसे सफेद रंग से पेंट किया गया। तबसे इसे व्हाइट हाउस कहा जाने लगा। लेकिन आधिकारिक तौर पर 1901 में इसे ‘व्हाइट हाउस’ नाम दिया गया।

*अरविन्द श्रीधर

