दि मेट (THE MET) : जहां 20 लाख से अधिक कलाकृतियां संग्रहीत हैं

न्यूयॉर्क शहर में 1870 में स्थापित’ मेट्रोपॉलिटन म्यूजियम ऑफ़ आर्ट’,अमेरिका का सबसे बड़ा कला संग्रहालय है।अपने संग्रह में 20 लाख से अधिक कलाकृतियां सहेजने वाला यह संग्रहालय,’दि मेट’ के नाम से मशहूर है।
संग्रहालय की इमारत लगभग 2 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में फैली हुई है। क्षेत्रफल की दृष्टि से भी ‘दि मेट’ की गणना विश्व के सबसे बड़े संग्रहालयों में होती है।
संग्रहालय स्थापित करने के विचार ने फ्रांस में जन्म लिया, जिसे अमेरिका के कलारसिकों ने अपना समर्थन प्रदान किया। अमेरिका में कला शिक्षा का विकास करने और विश्व की अलग-अलग संस्कृतियों में मौजूद कला की विभिन्न विधाओं को संग्रहित- संरक्षित करने के उद्देश्य से ‘मेट्रोपॉलिटन म्यूजियम ऑफ़ आर्ट’ की स्थापना की गई थी।

संग्रहालय की कला दीर्घाओं से गुजरने पर ऐसा महसूस होता है जैसे भूमंडल पर मौजूद लगभग समस्त कलाकृतियां एक छत के नीचे बैठकर जुगलबंदी कर रही हों।
संग्रहालय में 17 अलग-अलग कला दीर्घाएं हैं। इन दीर्घाओं में मिश्र-इजिप्ट से लगाकर अफ्रीका तक, यूरोपीय देशों से लगाकर एशिया तक और ग्रीक- रोमन से लगाकर आधुनिक अमेरिकी कलाओं तक सब कुछ संग्रहित है।
पाषाण काल और कांस्य युग की कलाकृतियों के साथ-साथ ईसा से 3000 वर्ष पूर्व तक की कलाकृतियां,हजारों वर्ष पूर्व विभिन्न देशों में प्रचलित वाद्य यंत्र,वेशभूषा, हथियारों सहित अमेरिका की आधुनिक कलाकृतियों के नमूनों तक,सब कुछ यहां देखा जा सकता है।
संग्रहालय के मिस्र विभाग में लगभग 26000 कलाकृतियां हैं, जो दर्शकों को मिश्र की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराती हैं।
यूरोपीय चित्रकला और मूर्तिकला से संबंधित 50000 से अधिक वस्तुएं यहां संग्रहित हैं, जो यूरोपीय संस्कृति और समृद्ध कलाओं की झलक प्रस्तुत करती हैं।
ग्रीक और रोमन कला से संबंधित 17000 से अधिक वस्तुएं अपने वैभवशाली अतीत की गवाही के रूप में यहां उपस्थित हैं।
संग्रहालय का एशियाई विभाग अत्यंत समृद्ध है। यहां प्रदर्शित कलाकृतियां एशियाई देशों के 4000 वर्ष से अधिक के कलात्मक नमूनों से साक्षात्कार कराती हैं। संग्रह में चीन,तिब्बत,नेपाल,म्यांमार, कंबोडिया, अफगानिस्तान,श्रीलंका और थाईलैंड की मूर्तियां,पेंटिंग,धातु के विभिन्न प्रकार के सजावटी सामानों के साथ-साथ अन्य कलाकृतियों भी शामिल हैं।

भारत के हिंदू,बौद्ध एवं जैन धर्म से संबंधित मूर्तियां और अन्य वस्तुएं अच्छी खासी संख्या में यहां संग्रहीत हैं। यह मूर्तियां और अन्य वस्तुएं पहली शताब्दी से लगाकर 16 वीं शताब्दी तक की हैं। बौद्ध एवं अन्य परंपरा के ग्रंथों की पांडुलिपियां,पेंटिंग्स और दैनिक उपयोग में आने वाली वस्तुओं का विशाल संग्रह यहां पर है।

अभी हाल ही में बौद्ध कलाओं पर केंद्रित एक विशेष प्रदर्शनी यहां पर आयोजित की गई थी, जिसमें 200 ईसा पूर्व से लगाकर 400 ई. तक की 150 से अधिक वस्तुओं को प्रदर्शित किया गया था।
अमेरिकी विभाग में 18वीं से 20वीं शताब्दी तक की कलाकृतियों के नमूने प्रदर्शित किए गए हैं।
यद्यपि प्रत्येक कलाकृति के साथ उसका संक्षिप्त परिचय भी अंकित किया गया है,लेकिन शोधार्थियों और कला इतिहास की बारीक जानकारी चाहने वालों के लिए प्रत्येक विभाग के साथ एक पुस्तकालय भी संबद्ध किया गया है। यह पुस्तकालय जिज्ञासुओं को संबंधित संस्कृति एवं कला के इतिहास से संबंधित जानकारी प्राप्त करने में सहायता प्रदान करता है।
यह एक प्रकार से वैश्विक कला और संस्कृति के ऐतिहासिक ग्रंथों का संग्रहालय भी है।

मेट्रोपॉलिटन म्यूजियम ऑफ़ आर्ट वित्तीय संसाधन जुटाने के लिए प्रतिवर्ष एक चैरिटी कार्यक्रम ‘मेट गाला’ भी आयोजित करता है। वस्त्र विन्यास पर केंद्रित यह कार्यक्रम,फैशन जगत का सबसे प्रतिष्ठित आयोजन माना जाता है। फैशन जगत के ऑस्कर समारोह के नाम से विख्यात मेट गाला में रेड कार्पेट पर चलना एक विशिष्ट उपलब्धि मानी जाती है।
‘दि मेट’ ने अपने आपको विश्व की तमाम कलाओं के ‘अपने घर’ के रूप में विकसित किया है। संग्रह की विविधता और समृद्धि के चलते इस संग्रहालय की गणना विश्व के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले कला संग्रहालय में होती है।

यह भी उल्लेखनीय है कि नीता अंबानी ‘दि मेट’ की पहली भारतीय ट्रस्टी नियुक्त की गई हैं। संग्रहालय प्रबंधन के अनुसार वैश्विक कला एवं संस्कृति को संरक्षित करने के प्रति उनकी असाधारण प्रतिबद्धता को देखते हुए उन्हें ट्रस्ट में शामिल किया गया है।
दि न्यू यॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी

यह एक सार्वजनिक पुस्तकालय है,जिसमें 53 मिलियन से अधिक पुस्तकों का संग्रह है। वाशिंगटन स्थित लाइब्रेरी ऑफ़ कांग्रेस के बाद यह अमेरिका का दूसरा सबसे बड़ा पुस्तकालय है।
यह सिर्फ पुस्तकालय नहीं, विश्व में उपलब्ध ज्ञान का अकूत भंडार और सांस्कृतिक केंद्र भी है।
पुस्तकालय के अंतर्गत 92 शाखाएं और शोध केंद्र आते हैं, जिनकी सेवाएं प्रत्येक नागरिक के लिए निशुल्क उपलब्ध हैं।
1911 में बनी इस लाइब्रेरी की इमारत का वास्तुविन्यास प्रभावित करता है। कहते हैं कि यदि अनुकूल माहौल उपलब्ध हो, तो ज्ञान की ग्राह्यता सुगम हो जाती है। इस इमारत में प्रवेश करते ही ऐसा लगने लगता है जैसे मेज-कुर्सी और दीवारें आपको अध्ययन के लिए प्रेरित कर रही हों।
अमेरिका को गढ़ने वाले भलीभांति जानते रहे हैं, कि देश को समृद्ध बनाने के लिए पुस्तकालयों का समृद्ध होना अत्यंत आवश्यक है।
कहना पड़ेगा कि अमेरिका ने विश्व भर में उपलब्ध ज्ञान को अपने पुस्तकालयों में संग्रहित कर आने वाली कई पीढ़ियों का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।
एक दिन में इतने विशाल पुस्तकालय को सिर्फ निहारा ही जा सकता है,और वही हमने किया। लेकिन इमारत से बाहर निकलते समय ऐसा महसूस हुआ,जैसे अपने अंतर्मन में गहरे तक पैठे पुस्तक प्रेम को एक और मजबूत समर्थन मिल गया हो।

*अरविन्द श्रीधर

