सायबर ठग लोगों को ठगने के नए नए तरीके अपना रहे हैं, सबसे नया मामला डीपफेक वीडियो बनाकर फिरौती वसूलने का सामने आया है। जिसमें अपराधियों ने एक गुमशुदा बच्चे का असली प्रतीत होने वाला वीडियो बनाकर उसके माता पिता से वसूली कर ली।
इस तरह की धोखाधड़ी से बचने के लिए आज के उन्नत तकनीक के दौर में सायबर फ्रॉड से बचने के लिए स्क्रीन लॉक या पासवर्ड बदलना काफी नहीं है। आपको अपनी डिजिटल आदतों में बदलाव करना होगा। यहाँ इससे बचाव से संबंधित सावधानी रखने के मुख्य बिंदु बताए गए हैं:
डीपफेक वीडियो और वॉयस कॉल की पहचान कैसे करें?
यदि आपको किसी परिचित का वीडियो कॉल या वॉयस मैसेज संदिग्ध लगे, तो इन सूक्ष्म संकेतों पर ध्यान दें:
अप्राकृतिक पलकें झपकना : कई एआई मॉडल अभी भी इंसान के पलक झपकने की प्राकृतिक लय को नहीं पकड़ पाते। अगर व्यक्ति बहुत कम या अजीब तरह से पलक झपका रहा है, तो सावधान हो जाएं।
होठों का तालमेल (लिप सिंक): ध्यान से देखें कि क्या आवाज़ और होठों का हिलना बिल्कुल सटीक है? अक्सर डीपफेक में थोड़ा सा ‘लैग’ होता है।
चेहरे के किनारे: अगर चेहरे और गर्दन के बीच की रेखा धुंधली दिखे या चेहरे के हिलने पर कान के पास की इमेज ‘पिक्सेलेट’ (तड़क रही) हो, तो वह एआई हो सकता है।
अजीब आवाज़ : एआई वॉयस क्लोनिंग में भावनाएं (इमोशन) अक्सर सपाट होती हैं। अगर आवाज़ रोबोटिक या बिना उतार-चढ़ाव वाली लगे, तो तुरंत कॉल काट दें।
“फैमिली सेफ्टी कोड” (पारिवारिक सुरक्षा पासवर्ड) बनाएं
यह सबसे प्रभावी तरीका है। अपने परिवार के साथ एक ‘सीक्रेट कोड’ (जैसे कोई गुप्त शब्द या नंबर) तय करें।
यदि कभी कोई आपातकालीन कॉल आए (जैसे- “मैं मुसीबत में हूँ, पैसे भेज दो”), तो पहले उनसे वह ‘सीक्रेट कोड’ पूछें।
एआई आपकी आवाज़ की नकल कर सकता है, लेकिन वह आपके परिवार के गुप्त समझौतों को नहीं जान सकता।
सोशल मीडिया पर “डिजिटल प्राइवेसी” का पालन करें
तस्वीरों का सीमित उपयोग : सोशल मीडिया प्रोफाइल को ‘प्राइवेट’ रखें। अनजान लोगों को अपनी फोटो गैलरी तक पहुँच न दें।
बच्चों की सुरक्षा : बच्चों की तस्वीरें और स्कूल की जानकारी साझा करने से बचें। अपराधियों के लिए बच्चों के चेहरे को मॉर्फ करना सबसे आसान होता है।
जियो-टैगिंग बंद करें : फोटो डालते समय अपनी लोकेशन टैग न करें। इससे कोई भी आपकी दिनचर्या और आदतों का पता लगा सकता है।
वित्तीय लेनदेन में सावधानी : पुष्टि के बिना भुगतान नहीं
यदि व्हाट्सएप पर कोई मित्र पैसे मांगे, तो उस मैसेज पर भरोसा न करें। उसे एक सामान्य फोन कॉल (न कि व्हाट्सएप कॉल) करें और पुष्टि करें।
ओटीपी सुरक्षा : याद रखें, एआई चाहे कितना भी स्मार्ट हो जाए, बिना आपकी गलती के वह आपके बैंक खाते से पैसे नहीं निकाल सकता। अपना ओटीपी कभी किसी को न दें।
पहले संदेह करें, फिर विश्वास करें
रिवर्स इमेज सर्च : अगर आपको कोई सनसनीखेज फोटो मिले, तो उसे गूगल के ‘सर्च बॉय इमेज’ विकल्प में डालकर चेक करें कि वह असली है या एआई जनित।
आधिकारिक स्रोत : किसी भी बड़ी खबर या सरकारी घोषणा के लिए केवल आधिकारिक न्यूज़ वेबसाइटों या सरकारी पोर्टल्स पर ही भरोसा करें।

अंत में एक छोटा सा सुझाव:
आप इस चेकलिस्ट को अपने परिवार के सदस्यों को बताईए। आपकी एक सतर्कता आपके पूरे परिवार को एक बड़े वित्तीय या मानसिक आघात से बचा सकती है।
*राजकुमार जैन
(स्वतंत्र लेखक)

