पत्रकारिता का स्वरूप लोकमंगलकारी होना चाहिए : विजयदत्त श्रीधर

karmveer By karmveer
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​नरसिंहपुर। हिंदी पत्रकारिता के गौरवशाली 200 वर्षों के इतिहास पर चर्चा करने और भविष्य की चुनौतियों पर आत्म-मंथन करने के उद्देश्य से नरसिंहपुर में आयोजित एक गरिमामय समारोह में मध्य प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार और लेखक पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर ने कहा कि पत्रकारिता का स्वरूप सदैव समाज और लोक मंगलकारी हो, इसकी महती आवश्यकता है ।

संगोष्ठी “हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष : पुनरावलोकन एवं आत्मावलोकन” विषय पर केंद्रित तिथि, जिसमें माधवराव सप्रे स्मृति समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान,भोपाल के संस्थापक पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

कार्यक्रम के दौरान श्री श्रीधर ने पत्रकारिता के उद्भव से लेकर वर्तमान स्वरूप तक के सफर को बड़ी बारीकी से उपस्थितजनों के समक्ष साझा किया। इस मौके पर उन्होंने पत्रकारिता के पुरखों को आदरांजलि देते हुए उनके योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने ने कहा कि जो बात छुपाई जाए,उसे बताया जाए वह पत्रकारिता है; और जो बात सब जानते हैं फिर भी बताई जाए, वह प्रचार है।

​पत्रकारिता पेशा नहीं राष्ट्र निर्माण का माध्यम

​पद्मश्री विजय दत्त श्रीधर ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदी पत्रकारिता का इतिहास केवल सूचनाओं का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि भारतीय स्वाधीनता संग्राम और सामाजिक चेतना का जीवंत दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि 1826 में “उदन्त मार्तण्ड” के प्रकाशन के साथ शुरू हुआ यह सफर आज डिजिटल युग तक पहुँच चुका है। उन्होंने वर्तमान दौर में पत्रकारिता के गिरते मूल्यों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज पत्रकारों को आत्मावलोकन की आवश्यकता है। उन्होंने हिंदी पत्रकारिता के पुरोधा स्व. माधवराव सप्रे के योगदान को याद करते हुए बताया कि उन्होंने सीमित संसाधनों में भी भाषाई मर्यादा और राष्ट्रीयहितों को सर्वोपरि रखा था। आज हिंदी समाचारों में अंग्रेजी के शब्दों का चलन बढ़ा है,जो हिंदी के लिये खतरा है। श्रीधर जी ने इस मौके पर अपनी जन्मस्थली बोहानी को प्रणाम किया और कहा कि मैं आज जो कुछ भी हूँ अपनी मातृभूमि और गुरुजनों, माता-पिता की बदौलत हूँ। आप जहाँ भी रहें विन्रम बने रहें। प्रतिद्वंदता न रखें। किसी से ईर्ष्या भाव न रखें।इंसानियत को सर्वोपरि रखें। हम बच्चों को भी अच्छे गुण सिखाएं उन्हें रोबोट न बनाएं,।बच्चे सभी भाषाओं का ज्ञान लें पर अपनी मातृभाषा को विस्मृत न करें। हम जब एक साथ हों तो अपनी स्थानीय भाषा में बात करें,यही हमारी पहचान है।

पंडित माखनलाल चतुर्वेदी और माधवराव सप्रे के अवदान को याद करते हुए श्री श्रीधर ने कहा – दोनों महापुरुष भारतीय पत्रकारिता और साहित्य के वह स्तंभ हैं, जिन्होंने न केवल हिंदी भाषा को समृद्ध किया, बल्कि अपनी लेखनी को स्वतंत्रता संग्राम का अस्त्र भी बनाया।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन कर, पत्रकारिता के पुरोधा श्री गणेश शंकर विद्यार्थी जी के चित्र पर माल्यार्पण कर हुई। इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष नीरज महाराज,महंत प्रीतम पुरी गोस्वामी, इंजी सुनील कोठारी, डाॅ संजीव चांदोरकर,अधिवक्ता संघ के सचिव सुलभ जैन, साहित्यकार अजय तुलसी, एड. प्रवीण शर्मा एवं संजय जैन सहित पत्रकार, साहित्यकार एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

कार्यक्रम का संचालन सुशांत पुरोहित ने एवं आभार व्यक्त बृजेश शर्मा ने किया।

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