सदा-सर्वदा प्रासंगिक हैं महावीर…

पंकज जैन By पंकज जैन
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एक रोचक प्रसंग है। विद्यालय में शिक्षक ने छात्र से पूछा- देर से क्यों आए? छात्र ने जवाब दिया- सर मैं एक बुढ़िया को सड़क पार करवा रहा था।
शिक्षक ने कहा – इसमें इतनी देर तो नहीं लगती।
छात्र ने मासूमियत से जवाब दिया – सर,दरअसल वह बुढ़िया सड़क पार करना ही नहीं करना चाहती थी।

कमोबेश यही हालत अमेरिका औऱ इजराईल क़ी है। वे जानते थे कि ईरान की जनता को कोई आज़ादी नहीं चाहिए! कम से कम इन दोनों की मदद से तो बिल्कुल भी नहीं। फिर भी दोनों अड़ गए इरानियों को आजादी दिलाने के लिए।

आज इन देशो ने पूरी दुनिया को युद्ध मे झोंक कर हलकान कर रखा है। छोटे छोटे देश,शहर तबाह हो रहे है। लोग मारे जा रहे है।चारो ओर दशहत का माहौल है।
ऐसे विकटतम समय मे भगवान महावीर के सिद्धांत ही हैं ,जो शांति स्थापित करवा सकते है। महावीर का प्रमुख सिद्धांत अनेकान्तवाद है,जो हर झगड़े का समूल खात्मा कर सकता है।
अनेकान्त याने सत्य को अलग-अलग दृष्टिकोण से देखना। सत्य बहुआयामी हो सकता है।एक दृष्टिकोण से एक पक्ष सही हो सकता है,लेकिन अन्य दृष्टिकोण से कोई अन्य भी सही हो सकता है।

“मैं ही सही” यह हठधर्मिता है।यही विवाद का मूल है। जबकि मैं भी सही, तुम भी सही यह व्यवहारिक है। यही भाव है जो सामन्जय स्थापित कर सकता है।
किसी ने सच ही तो कहा है –
तुम ही तुम हो तो क्या तुम हो।
हम ही हम है तो क्या हम है।
तुम भी रहो,हम भी रहें तो ही दुनिया चलेगी।

ट्रम्प औऱ नेतन्याहु की “हम ही सही हैं” की सोच ने दुनिया को विनाश की तरफ धकेल दिया है।

अब यंहा आता है महावीर का एक अन्य सिद्धांत “अपरिग्रह”। जिसके अनुसार जो प्राप्त है वह पर्याप्त है। उसमें भी दूसरों को देने कि भावना रखना।
जबकि युद्धरत देशों की सोच है -जो हमारा है वह तो है ही, पर जो तुम्हारा है, हमें उसे पर भी अधिकार करना है।
यंहा फिर भगवान महावीर का एक औऱ महान वाक्य याद आ जाता है- “जियो औऱ जीने दो”।
यह सोच प्राणिमात्र के जीवन के अधिकार को मान्य करती है।

आज वैश्विक परिदृश्य मे जो असंतोष औऱ भयावहता पसरी है, उसको खत्म करने का एकमात्र रास्ता महावीर के सिद्धांत ही है।
महावीर कल भी प्रासंगिक थे,आज भी है,कल भी रहेंगे।

पंकज जैन (धार,म.प्र.)
(लेखक सामाजिक कार्यकर्ता हैं।)

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