बेंगलुरु की घटना से क्या हम कोई सबक लेंगे?

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भारत में जान की कोई कीमत क्यों नहीं? कहीं रुद्राक्ष लूटने की भगदड़ में मौत, कहीं बाबा जी के आशीर्वाद की कीमत जिंदगी, कहीं नदी में पुण्य स्नान के लिए जान जोखिम में, कहीं अपने प्रिय क्रिकेट या फ़िल्मी सितारे को देख लेने के लिए जान हथेली पर! कौन हैं जश्न के जल्लाद? जश्न का शौक है तो तैयारी क्यों नहीं करते? बंगलुरु की घटना से क्या हम कोई सबक लेंगे? लोगों के बड़े जश्न को कैसे संभालेंगे, कोई योजना? कोई ब्लू प्रिंट? केवल ‘मुआवजे’ की बात, और किस्सा ख़त्म?

इंदौर में बेलेश्वर महादेव, झूलेश्वर मंदिर में रामनवमी के अवसर पर एक हवन कार्यक्रम के दौरान एक प्राचीन बावड़ी (कुएं) पर बनी स्लैब ढह गई, जिससे सौ से ज्यादा लोग नीचे गिर गए। 36 की मृत्यु हो गई, 16 घायल हो गए थे। क्या सबक सीखा? तारीख़ थी 30 मार्च 2023.

बिहार के पटना का गाँधी मैदान। दशहरा समारोह। तारीख 3 अक्टूबर 2014 । दशहरा उत्सव के दौरान रावण दहन के बाद भीड़ में अफवाह फैली कि कोई खतरा है, जिससे भगदड़ मच गई। 32 लोगों की मौत, 26 घायल। तब बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी थे। (उन्होंने 20 मई 2014 से 22 फरवरी 2015 तक बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। )उन्होंने क्या किया और बाद में नीतीश कुमार ने क्या किया? पता हो तो बताइये?

राजमुंदरी, आंध्र प्रदेश (14 जुलाई 2015) स्थान: गोदावरी नदी तट, पुष्करम त्योहार। पवित्र स्नान के लिए भारी भीड़ इकट्ठा हुई, और अपर्याप्त प्रबंधन के कारण स्थिति अनियंत्रित हो गई। भगदड़ में 27 की मृत्यु, 20 घायल। कौन दोषी था? किसकी लापरवाही थी? क्या एक्शन हुआ उस पर?

हाथरस, उत्तर प्रदेश। तारिख 2 जुलाई 2024। स्थान : सिकंदराराऊ, भोले बाबा सत्संग कार्यक्रम। भोले बाबा की कार के निकलने पर भक्त उनके पैर छूने दौड़े, जिससे भीड़ अनियंत्रित हो गई। अपर्याप्त सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन ने स्थिति को और गंभीर किया। कुल 121 लोगों की मृत्यु हो गई। सैकड़ों घायल हुए। आयोजक पर क्या एक्शन हुआ? दुर्घटना से क्या सबक सीखा? न्यायिक आयोग ने जांच की, जिसमें आयोजकों और स्थानीय पुलिस को लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठहराया गया, जबकि भोले बाबा को क्लीन चिट दी गई।

आयोजकों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया। भीड़ प्रबंधन के लिए सख्त अनुमति प्रक्रिया और बेहतर योजना लागू करने की ‘सिफारिश’ की गई।

प्रयागराज, उत्तर प्रदेश। तारीख 29 जनवरी 2025 । महाकुंभ, संगम क्षेत्र। मौनी अमावस्या के अवसर पर पवित्र स्नान के लिए लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ के कारण भगदड़। अपर्याप्त भीड़ नियंत्रण और संकरे रास्तों ने स्थिति को और बिगाड़ा। 30 लोगों की मृत्यु, 60 घायल।

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, दिल्ली। तारीख 16 फरवरी 2025 । नई दिल्ली के रेलवे स्टेशन, प्लेटफॉर्म 14-16 पर महाकुंभ के लिए ट्रेनों की प्रतीक्षा में भारी भीड़ और प्लेटफॉर्म बदलने की अफवाह के कारण भगदड़। फुटओवर ब्रिज पर अत्यधिक भीड़ ने स्थिति को और खराब किया। 18 लोगों की मृत्यु। 24 घायल। केंद्र सरकार ने जांच के आदेश दिए।

मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों को 2.5 लाख रुपये, और मामूली घायलों को 1 लाख रुपये मुआवजा घोषित किया गया।

रेलवे ने भीड़ प्रबंधन में सुधार के लिए कदम उठाने की बात कही, लेकिन ठोस कार्यान्वयन की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

धार्मिक आयोजन : अधिकांश भगदड़ धार्मिक समारोहों (पुष्करम, महाकुंभ, सत्संग) में हुईं, जहां लाखों लोग एकत्र होते हैं।

अपर्याप्त प्रबंधन : संकरे रास्ते, अपर्याप्त सुरक्षा, और खराब भीड़ नियंत्रण।

अफवाहें: पटना और नई दिल्ली में अफवाहों ने भगदड़ को बढ़ावा दिया।
आयोजन की अनुमति में लापरवाही: हाथरस में आयोजकों को अधिक भीड़ की अनुमति देना।

प्रत्येक घटना के बाद जांच समितियां गठित की गईं, लेकिन दोषियों पर सख्त कार्रवाई या दीर्घकालिक सुधारों का अभाव देखा गया।

निवारक उपाय : राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के दिशानिर्देश मौजूद हैं, लेकिन उनके कार्यान्वयन में कमी रही। कुछ सुझाव शामिल हैं :

बायोल्यूमिनसेंट वॉक-वे और इंटरैक्टिव डिस्प्ले जैसे नवाचार।
भीड़ निगरानी के लिए ड्रोन और सीसीटीवी का उपयोग।
जन जागरूकता अभियान और बेहतर अनुमति प्रक्रिया।

ज्यादातर मामलों में भगदड़ का मुख्य कारण अपर्याप्त भीड़ प्रबंधन, अफवाहें और धार्मिक आयोजनों में भारी भीड़ रहा। प्रशासन ने तत्काल राहत और मुआवजा प्रदान किया, लेकिन दीर्घकालिक सुधारों में कमी है।

-डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी

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1 Comment
  • महोदय,
    बैंगलोर में हाल की भगदड़ में कई निर्दोष जानें चली गईं, जो हृदयविदारक है। यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि भीड़ प्रबंधन में विफलताओं का परिणाम है। राजनीतिक दोषारोपण से अधिक जरूरी है कि इस त्रासदी को भविष्य के लिए सबक बनाया जाए।

    हमें भीड़ प्रबंधन की तत्काल सख्त मानक संचालन प्रक्रियाएँ (SOP) विकसित करनी चाहिए, जो हर सार्वजनिक आयोजन के लिए अनिवार्य हों

    1. क्षमता के अनुसार टिकटिंग,
    2. पर्याप्त निकास मार्ग और आपातकालीन प्रकाश व्यवस्था,
    3. प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मी और भीड़ नियंत्रण तकनीक, पर्याप्त सुरक्षा बल
    4. स्थल-विशिष्ट जोखिम आकलन।

    सरकार को एक स्थायी भीड़ प्रबंधन नीति बनानी चाहिए, जिसका कड़ाई से पालन हो। नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है। ऐसी त्रासदियाँ मानवीय लापरवाही की देन हैं, जिन्हें कानूनी ढाँचे और तकनीकी नवाचार से रोका जा सकता है। हमें मृतकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए, उनकी व्यर्थ मौतों को सार्थक बनाने का संकल्प लेना होगा।

    भवदीय,
    विवेक रंजन श्रीवास्तव
    भोपाल

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