डिजिटल टोकन और फिनटर्नेट: भारत में होने वाली है संपत्ति निवेश की क्रांति

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भारत मेंसंपत्ति खरीदना हमेशा से एक जटिल प्रक्रिया रही है, जिसमें भारी पूंजी, लंबी कागजी कार्यवाई और कानूनी जोखिम शामिल होते हैं। परंतु अब तकनीक के क्षेत्र में एक नई क्रांति होने जा रही है जो संपत्ति निवेश के पारंपरिक तरीकों को पूरी तरह बदल देगी। डिजिटल टोकन और फिनटर्नेट की यह नई अवधारणा आम लोगों के लिए संपत्ति निवेश के दरवाजे खोलने वाली है।

संपत्ति निवेश की वर्तमान चुनौतियाँ:

आज भारत मेंसंपत्ति खरीदने के लिए बड़ी पूंजी की आवश्यकता होती है, जो अधिकांश मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए एक बड़ी बाधा है। इसके अलावा टाइटल डीड, सेल डीड, एनकंब्रेंस सर्टिफिकेट जैसे दस्तावेजों की जटिल प्रक्रिया और संपत्ति के कानूनी विवादों का खतरा आम आदमी को संपत्ति निवेश से दूर रखता है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत में 90% खरीदार संपत्ति निवेश से उचित लाभ नहीं ले पाते हैं।

डिजिटल टोकन:

डिजिटल टोकन संपत्तिनिवेश की दुनिया में एक क्रांतिकारी बदलाव लेकर आ रहे हैं। यह कुछ वैसा ही है जैसे म्यूचुअल फंड में निवेश करके छोटी रकम से बड़ी कंपनियों के शेयर खरीदे जा सकते हैं। डिजिटल टोकन के माध्यम से कोई भी व्यक्ति किसी बड़ी संपत्ति जैसे शॉपिंग मॉल, ऑफिस बिल्डिंग या आवासीय परिसर के छोटे-छोटे हिस्से खरीद सकता है। यह हिस्सेदारी ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित होती है, जो पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

फिनटर्नेट की भूमिका:
फिनटर्नेट वह डिजिटल ढाँचाहै जो इस पूरी प्रक्रिया को संभव बनाएगा। इसके तहत किसी बड़ी संपत्ति का मूल्यांकन करके उसे लाखों छोटे डिजिटल टोकन में बाँट दिया जाएगा। इन टोकनों को कोई भी व्यक्ति ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से खरीद और बेच सकेगा। एक टोकन की कीमत कुछ सौ रुपये से लेकर कुछ हज़ार रुपये तक हो सकती है, जिससे छोटे निवेशकों के लिए संपत्ति निवेश संभव हो सकेगा।

नंदन नीलकेणी का योगदान:

इस क्रांतिकारीबदलाव में नंदन नीलकेणी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इंफोसिस के सह-संस्थापक नीलकेणी ने आधार जैसी परियोजनाओं के माध्यम से भारत के डिजिटल बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब वह फिनटर्नेट के माध्यम से भारत की संपत्ति निवेश प्रणाली में क्रांति लाने के लिए काम कर रहे हैं। उनकी इस पहल को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिल रही है और कई वैश्विक संस्थाएँ इस परियोजना से जुड़ रही हैं।

लाभ और संभावनाएँ:
इस नई प्रणालीके कई लाभ हैं। सबसे बड़ा लाभ यह है कि अब आम लोग कम पूंजी से भी बड़ी संपत्तियों में निवेश कर सकेंगे। दूसरा, संपत्ति की खरीद-बिक्री की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित होगी। तीसरा, निवेशक अपना पोर्टफोलियो विविधतापूर्ण बना सकेंगे, वे दिल्ली के मॉल, मुंबई के ऑफिस और बेंगलुरु के आवासीय परिसर में एक साथ निवेश कर सकेंगे।

चुनौतियाँ और समाधान:
हर नई तकनीक कीतरह इसमें भी कुछ चुनौतियाँ हैं। साइबर सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता का विषय है। सरकार को इसके लिए मजबूत कानूनी ढाँचा तैयार करना होगा और साइबर सुरक्षा को सुनिश्चित करना होगा। साथ ही आम लोगों को इस नई प्रणाली से परिचित कराने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता होगी।

निस्संदेह डिजिटल टोकन और फिनटर्नेट भारत में संपत्ति निवेश के क्षेत्र में एक क्रांति लाने वाले हैं। यह प्रौद्योगिकी संपत्ति बाजार को लोकतांत्रिक बनाएगी और आम आदमी को वित्तीय समृद्धि की मुख्यधारा से जोड़ेगी। नंदन नीलकेणी जैसे दूरदर्शी नेतृत्व में यह परिवर्तन भारत की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है। भारत सरकार ने 2026 तक इस नई प्रणाली को लागू करने का लक्ष्य रखा है, जिसके बाद भारत का संपत्ति बाजार पूरी तरह रूपांतरित हो जाएगा।

विवेक रंजन श्रीवास्तव

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