अमेरिका टूर डायरी -1

6 Min Read

सामान्यतः कायदा कानून मानने वाले नागरिक, राष्ट्र की अमूल्य निधि होते हैं…

वैसे तो किसी देश अथवा समाज को समझने के लिए एक सप्ताह का वक्त कम ही होता है,लेकिन फिर भी वहां के नागरिक व्यवहार को मोटे तौर पर तो आंका ही जा सकता है।

मैरीलैंड और वाशिंगटन की सड़कों पर एक सप्ताह भटकने के बाद इतना तो निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि यहां के नागरिक यातायात नियमों का स्वाभाविक रूप से पालन करते हैं। केवल पालन ही नहीं करते,बल्कि दूसरों की सुविधा का भी पूरा ख्याल रखते हैं।

उदाहरण के लिए,कॉलोनी की आंतरिक सड़क से मुख्य मार्ग पर आने के पहले हर वाहन चालक पहले दोनों तरफ देखते हैं। मुख्य मार्ग के वाहनों को पहले निकलने देते हैं, फिर आगे बढ़ते हैं।

चौराहे पर बनी जेब्रा क्रॉसिंग पर वाहन चालक पैदल सड़क पार करने वालों को प्राथमिकता देते हैं। इसके लिए भले ही उन्हें थोड़ी देर रुकना क्यों ना पड़े।

एक और व्यवस्था ने प्रभावित किया। मुख्य मार्ग पर तो पैदल सड़क पार करने के लिए सिग्नल की व्यवस्था है,लेकिन मुख्य मार्ग से हटकर कैंपस के आंतरिक चौराहों पर पैदल यात्रियों की सुविधा के लिए एक विशिष्ट व्यवस्था है। पैदल सड़क पार करने के लिए चिन्हित स्थान पर सड़क के दोनों और लगे खंबो पर स्विच लगे हैं,जिसे दवाने से चौराहे पर लगे सिग्नल यह प्रदर्शित करने लगते हैं कि कोई पैदल सड़क पार कर रहा है।

दूसरों की सुविधा का ख्याल रखने की यही प्रवृत्ति गाड़ी पार्क करते समय देखने में आती है। तीन-चार गाड़ियां पार्किंग एरिया में प्रवेश करती हैं,और हर वाहन चालक प्रयास करता है कि पहले सामने वाला वाहन व्यवस्थित रूप से पार्क हो जाए। कहीं कोई हड़बड़ी नहीं।

लाल बत्ती पर गाड़ियां खड़ी करते समय दो गाड़ियों के बीच में पर्याप्त दूरी रखना वाहन चालकों की आदत में सुमार है।

शुरुआती एक-दो दिन तो मुझे लगा था कि मेरी बेटी ने अमेरिका में थोड़े दिन पहले ही कर चलाना प्रारंभ किया है इसलिए शायद अतिरिक्त सावधानी बरत रही है, लेकिन बाद में स्पष्ट हुआ कि यह एक सामान्य व्यवहार है।

यातायात नियमों का ऐसा पालन निजी वाहन चालक ही नहीं,टैक्सी ड्राइवर भी करते हैं।

सड़क के दोनों ओर साफ सुथरे फुटपाथ बने हैं,
जिनका उपयोग पैदल चलने वाले निर्वाध रूप से कर सकते हैं। फुटपाथों पर ‘ई स्कूटर’ चलाते इक्का-दुक्का लोग दिख जाते हैं, लेकिन वह भी पैदल चलने वालों सुविधा का पूरा ख्याल रखते हैं।

सार्वजनिक परिवहन सेवा की बसें भी बेहद व्यवस्थित तरीके से चलती हैं। निर्धारित स्टॉप पर बस खड़ी होते ही प्रवेश द्वार की सीढ़ियां थोड़ी नीचे आ जाती हैं,ताकि यात्री आसानी से चढ़ सके। यदि कोई व्हील चेयर पर बैठा व्यक्ति बस में चढ़ना चाहता है तो बाकायदा स्लोप खुलता है, और बड़ी आसानी से व्यक्ति व्हील चेयर सहित बस में चढ़ जाता है।
इस दौरान अन्य यात्री सामने वाले की सुविधा का पूरा ख्याल रखते हैं।

मेट्रो सेवा बहुत आरामदायक है। केवल अपनी संरचनात्मक विशेषताओं के कारण नहीं,बल्कि उसका उपयोग करने वाले नागरिकों के सद्व्यवहार के कारण भी। मेट्रो स्टेशन पर लगभग हर 6 मिनट में मेट्रो ट्रेन आती है,और यात्री बड़े इत्मीनान से चढ़ते और उतरते हैं। कोई भागमभाग नहीं।

9/11 की घटना के बाद अमेरिका में सुरक्षा पर विशेष जोर दिया जाता है। इसी के तहत शैक्षणिक संस्थाओं और कॉलोनियों में जगह-जगह नीली बत्तियां लगी हैं। इनके बारे में पूछने पर पता चला कि यहां लगे फोन से पुलिस अथवा अन्य इमरजेंसी सेवाओं को तत्काल खबर की जा सकती है।

धरती से लगाकर आसमान तक सब कुछ एकदम स्वच्छ होना बेहद प्रभावित करता है। अमेरिका में इस समय पतझड़ का मौसम है। जाहिर है सूखे पत्ते बड़ी मात्रा में नीचे गिरते हैं, जिन्हें मशीनों के माध्यम से बड़ी आसानी से एकत्रित कर उठा लिया जाता है।
अलग-अलग प्रकार के कचरे के लिए थोड़ी-थोड़ी दूर पर कंटेनर रखे हैं। अपने घर का कचरा नागरिक स्वयं उनमें जाकर डालते हैं। जहां से कचरा वाहन उठाकर ले जाता है।
घर-घर से कचरा एकत्रित करने जैसी कोई गतिविधि यहां नज़र नहीं आई; जो नागरिकों की स्वच्छता के प्रति समझ और कर्तव्यबोध की परिचायक है।

पूरे वर्ष में यहां सिर्फ 11 फेडरल अवकाश हैं। इनमें त्यौहार भी शामिल हैं और राष्ट्रीय महत्व की तिथियां-दिवस भी। कुछ राज्यों में स्थानीय महत्व के आधार पर कुछ अन्य अवकाश हो सकते हैं, लेकिन सामान्यतः विशिष्ट दिवस अथवा महापुरुषों की जयंतियों पर अवकाश होना चलन में नहीं है।

संयुक्त राज्य अमेरिका की राजधानी होने के बाद भी वॉशिंगटन,डीसी में कहीं भी बैनर-होर्डिंग्स का नज़र नहीं आना अच्छा भी लगा और अटपटा भी।

ऐसा नहीं है कि मैं यहां की ऊपरी चमक-दमक से प्रभावित होकर यह सब लिख रहा हूं। निश्चित रूप से यहां की व्यवस्थाओं में भी कुछ खामियां होंगी। लेकिन यह तथ्य ध्यान में रखे जाने योग्य है कि यदि किसी देश के नागरिक सामान्य रूप से नियम-कानून को मानने वाले हों,तो समुदाय में पैदा होने वाली अधिकांश झंझटें अव्वल तो पैदा ही नहीं होतीं; और यदि होती भी हैं,तो आसानी से हल की जा सकती हैं।
सामान्यतः कायदा-कानून मानने वाले नागरिक, किसी भी राष्ट्र की अमूल्य निधि होते हैं…

*अरविन्द श्रीधर

इस पोस्ट को साझा करें:

WhatsApp
Share This Article
2 Comments

Leave a Reply to Vivek Ranjan Shrivastava Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *