सप्रे संग्रहालय में ‘पुरखों को प्रणाम : पोस्टर प्रदर्शनी” और पुस्तक विमोचन

दीपक पगारे By दीपक पगारे
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उस दौर की पत्रकारिता के संघर्ष से युवा पीढ़ी को परीचित कराना आवश्यक: राज्यपाल

राज्यपाल मंगुभाई पटेल का कहना है कि आज तकनीकी सुविधाओं ने चीजों को बहुत आसान कर दिया है, लेकिन आज से दो सौ साल पहले अभावों और अंगरेजों के आतंक बावजूद हमारे पूर्वजों ने किस तरह पत्रकारिता की थी, इस इतिहास से नई पीढ़ी को अवगत कराना बहुत जरूरी है।तभी वे पत्रकारिता के महत्व और दायित्व दोनों से परीचित हो सकेंगे।
राज्यपाल माधवराव सप्रे संग्रहालय में हिंदी पत्रकारिता द्विशताब्दी महोत्सव के तहत आयोजित किये जा रहे कार्यक्रमों की श्रंखला में ‘पुरखों को प्रणाम:पोस्टर प्रदर्शनी’ तथा पुस्तक ‘पीर पराई जाने रे’ के विमोचन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मूर्धन्य संपादक महेश श्रीवास्तव ने की तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में महापौर मालती राय तथा राज्यपाल के प्रमुख सचिव नवनीत मोहन कोठारी उपस्थित थे।
राज्यपाल श्री पटेल ने आगे कहा कि यहां जो पोस्टर प्रदर्शनी लगी है उसमें हमारा गौरवशाली अतीत समाया हुआ है। इसे देखने के बाद हमारे पूर्वजों के प्रति हमारा मन श्रद्धा से भर उठता है। उन्होंने सभी से प्रदर्शनी देखने का आग्रह किया।

कार्यक्रम के अध्यक्ष वरिष्ठ संपादक महेश श्रीवास्तव ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक दिन है, जब हम त्यागी और बलिदानी संपादकों का स्मरण कर रहे हैं। ऐसी विभूतियों का स्मरण कर हम एक तरह से उनके ऋण से उऋण हो रहे हैं। उन्होंने सप्रे संग्रहालय से अपने निजी संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब भी वर्तमान समय का इतिहास लिखा जाएगा तो सप्रे संग्रहालय और उसके संस्थापक विजयदत्त श्रीधर का नाम प्रमुखता से लिखा जाएगा। अपने भीतर इतिहास को संजोने वाला यह भवन एक श्रमजीवी पत्रकार की दृढ़ इच्छाशक्ति का ही प्रतीक है।

विशेष अतिथि महापौर मालती राय ने कहा कि आज जब हम पत्रकारिता के दो सौ साल पूरे होने का उत्सव मना रहे हैं तब उन मनीषियों का स्मरण करना सुखद है जिन्होंने तमाम कठिनाइयों के बाद भी इस कार्य की पवित्रता को बनाये रखा था। इस अच्छे आयोजन के लिए महापौर ने सप्रे संग्रहालय की सराहना की।

राज्यपाल के प्रमुख सचिव नवनीत मोहन कोठारी ने कहा कि हम पौराणिक काल की बात करें तो हमारे सामने दो ही पत्रकार हुए हैं, जिन्होंने सही सूचनाओं का आदान-प्रदान किया था। इनमें एक थे देवर्षि नारद और दूसरे महाभारत के संजय। लेकिन हम वर्तमान काल की बात करें तो तमाम बदलावों के बाद भी पत्रकारिता अपना धर्म निभा रही है।
आरंभ में संग्रहालय के संस्थापक निदेशक विजयदत्त श्रीधर ने स्वागत् वक्तव्य देते हुए कहा – आयोजन के पीछे प्रदेश के आठ करोड़ नागरिकों की ओर से कलम के पुरखों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भाव है। इस प्रदर्शनी में हमारे पूर्वज लेखकों और संपादकों से संबंधित जानकारी को संजोया गया है,जिससे आने वाली पीढ़ी इन मनीषियों के त्याग और साधना को समझ सकेगी। उन्होंने बताया कि अब यह प्रदर्शनी सप्रे संग्रहालय की दीर्घा का स्थायी हिस्सा होगी।

कार्यक्रम में पुस्तक ‘पीर पराई जाने रे’ का विमोचन किया गया। इस पुस्तक में राज्यपाल मंगुभाई पटेल के व्यक्तित्व और कृतित्व को केंद्र में रखा गया है। पुस्तक की लेखिका शिल्पी दिवाकर ने बताया कि राज्यपाल जी के साथ कार्य करते हुए मैंने यह अनुभव किया कि उनका जीवन एक साधना है। एक सामान्य परिवार से निकलकर यहां तक का सफर तय करने वाले राज्यपाल जी ने हमेशा दूसरों की पीड़ा को समझा है। उनके जीवन के इन सभी पक्षों का सार है यह पुस्तक ‘पीर पराई जाने रे’।

आरंभ में संगहालय की ओर से विवेक श्रीधर, डॉ. अल्पना त्रिवेदी ने अतिथियों का स्वागत किया। राज्यपाल को संविधान सभा के सदस्यों की तस्वीर भी भेंट की गई। चित्रकार आलोक भावसार ने राज्यपाल की माताजी की चित्रकृति भेंट की तथा रक्शांना जाहिद ने सशक्त मप्र थीम पर तैयार पेंटिग भेंट की। अंत में आभार प्रदर्शन डॉ. मंगला अनुजा ने किया तथा संचालन निदेशक अरविंद श्रीधर ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में शहर के प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

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1 Comment
  • पुरखों की विरासत को सहेजने वाले एक मात्र संस्थान सप्रे संग्रहालय को इस अद्भुत आयोजन के लिए साधुवाद

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