पत्रकारिता के गौरवशाली इतिहास को संजोने और उसे भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने की एकनिष्ठ साधना में संलग्न देश के वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर को रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय,जबलपुर द्वारा डी लिट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय द्वारा की गई इस पहल की सर्वत्र
प्रशंसा की जा रही है। अकादमिक जगत की अनेक हस्तियों ने इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। प्रायः सभी का कहना है कि श्रीधर जी की सुदीर्घ साधना को देखते हुए विश्वविद्यालयों को यह कदम पहले ही उठा लेना चाहिए था। डी लिट की मानद उपाधि से श्रीधर जी के कृतित्व को तो अकादमिक स्वीकृति मिली ही है, एक साधक पत्रकार को सम्मानित कर विश्वविद्यालय भी गौरवान्वित हुआ है।
श्री विजयदत्त श्रीधर को डी.लिट. की मानद उपाधि के लिए चुना जाना वस्तुतः उनकी चार दशक से अधिक की सतत साधना का सम्मान है। उल्लेखनीय है कि श्री विजयदत्त श्रीधर को माधवराव सप्रे स्मृति समाचारपत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान की स्थापना तथा पत्रकारिता इतिहास के प्रामाणिक शोध एवं प्रलेखन के लिए वर्ष 2012 में राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल ने पद्मश्री अलंकरण से विभूषित किया था। शिक्षा एवं शोध में असाधारण योगदान के लिए संस्कृति विभाग, मध्यप्रदेश शासन ने महर्षि वेदव्यास राष्ट्रीय सम्मान (2012-13) से सम्मानित किया। छत्तीसगढ़ सरकार ने माधवराव सप्रे राष्ट्रीय रचनात्मकता सम्मान (2015) प्रदान किया। आपकी पुस्तक ‘पहला सम्पादकीय’ को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार ने ‘भारतेंदु हरिश्चन्द्र पुरस्कार’ (2011) प्रदान किया। हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग के सर्वोच्च सम्मान ‘साहित्य वाचस्पति’ से आपको अधिवेशन (2025) में विभूषित किया गया।
श्री विजयदत्त श्रीधर की अकादमिक उपलब्धियाँ महत्वपूर्ण हैं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल की शोध परियोजना ‘स्वतंत्र भारत में भारतीय भाषाओं की पत्रकारिता’ के निदेशक के रूप में पाँच वर्ष की अवधि में 75 शोध कार्यों का संयोजन, संपादन और प्रकाशन किया। आपके ग्रंथ ‘समग्र भारतीय पत्रकारिता’ (तीन भाग) को पहले आधार ग्रंथ के रूप में अकादमिक जगत और भारतीय भाषाओं की पत्रकारिता में असाधारण मान्यता और सराहना मिली है।
श्री विजयदत्त श्रीधर के कृतित्व पर दो पीएच.डी. हो चुकी हैं। डॉ. सुनीता सिंह के शोध प्रबंध ‘मध्यप्रदेश की स्वतंत्र्योत्तर हिन्दी पत्रकारिता : विजयदत्त श्रीधर के विशेष संदर्भ में’ पर बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल ने पीएच.डी. की उपाधि प्रदान की है। डॉ. चन्द्रमणि के शोध प्रबंध ‘विजयदत्त श्रीधर की पत्रकारिता में इतिहास बोध’ पर महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा ने पीएच.डी. की उपाधि प्रदान की है। श्री विजयदत्त श्रीधर के निर्देशन में डॉ. अंजली कुमार हुआ के शोध प्रबंध ‘स्वतंत्र भारत में हिन्दी सम्पादकों की बदलती भूमिकाओं का विश्लेषणात्मक अध्ययन’ पर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल ने पीएच.डी. की उपाधि प्रदान की है।
बृजेश शर्मा, नरसिंहपुर

