अन्तरराष्ट्रीय युवा दिवस (12 अगस्त): संकल्प और सरोकार

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आज का भारत एक ऐसे नवजागरण का साक्षी बन रहा है, जहाँ देश का क्षितिज युवाओं की अनंत ऊर्जा, नवाचार और अटूट संकल्प शक्ति से दीप्तिमान है। अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस इसी युवा शक्ति को पहचानने और उसके प्रति समाज की जिम्मेदारी को समझने का अवसर है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि युवा केवल भविष्य की उम्मीद नहीं, बल्कि वर्तमान के सक्रिय भागीदार हैं। आज की हमारी जेन-जी अपने सपनों को लेकर सजग है और साथ ही समाज, देश और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी समझ रही है।
स्वामी विवेकानंद ने युवा शक्ति को राष्ट्र की जीवंत चेतना माना था। उनका संदेश “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए” आज भी उतना ही प्रासंगिक है। यह संदेश व्यक्तिगत सफलता से आगे बढ़कर चरित्र, सेवा और राष्ट्र निर्माण की राह दिखाता है। भारत की लगभग 60 करोड़ युवा आबादी इस ऊर्जा की व्यापकता को दर्शाती है। ‘स्वयं सजे, वसुंधरा संवार दें’ की भावना के साथ युवा अपने जीवन को बेहतर बनाने के साथ समाज और प्रकृति के लिए भी योगदान दे रहे हैं।
आज छोटे शहरों और गांवों से लेकर महानगरों तक युवा शिक्षा, उद्यमिता, तकनीक, कृषि, खेल, कला और सामाजिक सेवा के नए रास्ते तलाश रहे हैं। उनके प्रयासों में अपने लिए बेहतर भविष्य के साथ देश के लिए कुछ करने की आकांक्षा भी दिखाई देती है।
युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय का ‘माय भारत’ प्लेटफार्म युवाओं को नेतृत्व क्षमता के साथ अपनी अभिरुचि के अनुरूप अवसरों से जोड़ने का महत्वपूर्ण मंच बना है। ‘राष्ट्रीय युवा संसद’ जैसे कार्यक्रम युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को समझने और अपने विचार व्यक्त करने का अवसर देते हैं। ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ जैसी पहल के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों के युवा अपने विचार, अनुभव और नवाचार नेतृत्व के साथ साझा कर रहे हैं। यह सहभागिता और भागीदारी लोकतंत्र को और जीवंत बनाती है।
युवा शक्ति का यह विस्तार सामाजिक जीवन में भी दिखाई देता है। ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ जैसी पहल के माध्यम से युवा देश की विविध भाषाओं, परंपराओं और संस्कृतियों को करीब से समझ रहे हैं। राष्ट्रीय कैडेट कोर और राष्ट्रीय सेवा योजना से जुड़े युवा सेवा, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को अपने जीवन का हिस्सा बना रहे हैं। नशामुक्ति, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जनजागरूकता जैसे अभियानों में युवाओं की भागीदारी समाज में सकारात्मक बदलाव की जमीन तैयार कर रही है।
मध्य प्रदेश भी युवा ऊर्जा से समृद्ध प्रदेश है। 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग की लगभग दो करोड़ युवा प्रदेश के विकास की बड़ी शक्ति है। आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास,संस्कृति विभाग द्वारा नियमित आयोजित हो रहे अद्वैत जागरण शिविरों में देश-विदेश के युवा जुड़कर एकात्मता और अद्वैत का वैश्विक स्तर पर प्रसार कर रहे है ,यह युवा शंकरदूत के रूप में आदर्श युवा के रूप में एकात्मता के पथ पर चलने के लिए संकल्पित हैं । वहीं राज्य की युवा नीति शिक्षा, कौशल, रोजगार, उद्यमिता, स्वास्थ्य और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में युवाओं को अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है। आज प्रदेश का युवा अपने गांव और शहर की सीमाओं से आगे बढ़कर राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। आवश्यकता इस बात की है कि उसकी प्रतिभा को सही अवसर, मार्गदर्शन और भरोसा मिले।

खेल के क्षेत्र में पिछले वर्षों में युवाओं की उपलब्धियों ने देश का आत्मविश्वास बढ़ाया है। ‘खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया’ जैसे अभियानों ने छोटे शहरों और दूरदराज के क्षेत्रों की प्रतिभाओं को मंच उपलब्ध कराया है। मीराबाई चानू का समर्पण और नीरज चोपड़ा की ऐतिहासिक उपलब्धियां इस बदलते भारत की तस्वीर प्रस्तुत करती हैं। इनके पीछे वर्षों की मेहनत, अनुशासन और परिवार, प्रशिक्षकों तथा समाज का सहयोग भी शामिल है।
युवा ऊर्जा की उड़ान खेल के मैदान तक ही सीमित नहीं है। चंद्रयान मिशन की सफलता ने भारत की वैज्ञानिक क्षमता को विश्व के सामने रखा और युवाओं के लिए अंतरिक्ष विज्ञान के नए सपने खोले। तकनीक, स्टार्टअप, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, कला और नवाचार; हर क्षेत्र में युवा नए प्रयोग कर रहे हैं। उनके प्रयासों में आधुनिकता के साथ भारतीय मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना का मेल भी दिखाई देता है।
आज के भारत की युवा शक्ति की सबसे बड़ी विशेषता उसकी विविधता है। कोई गांव में रहकर खेती में नई तकनीक अपना रहा है, कोई स्टार्टअप के माध्यम से रोजगार के अवसर बना रहा है, कोई खेल में देश का प्रतिनिधित्व कर रहा है और कोई समाजसेवा के माध्यम से अपने आसपास का जीवन बेहतर बना रहा है। इन सभी प्रयासों में एक साझा भाव दिखाई देता है— अपने जीवन को सार्थक बनाने के साथ देश के विकास में अपनी भूमिका निभाने का संकल्प। युवा दिवस का वास्तविक संदेश भी यही है कि युवा शक्ति को केवल उत्सव के रूप में देखने के बजाय उसे अवसर, विश्वास और जिम्मेदारी से जोड़ा जाए। जब युवाओं को अपनी प्रतिभा के अनुरूप अवसर मिलते हैं और उनके विचारों को सम्मान मिलता है, तब वे परिवर्तन के प्रभावी वाहक बनते हैं।
भारत आज जिस विकसित और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर बढ़ रहा है, उसकी सबसे बड़ी पूंजी उसका युवा है। संकल्प से सिद्धि तक की यह यात्रा तभी और मजबूत होगी, जब युवा अपने सपनों के साथ समाज और राष्ट्र के प्रति अपने सरोकारों को भी साथ लेकर चलेंगे। यही ऊर्जा, यही संवेदना और यही जिम्मेदारी नव-भारत के क्षितिज को और अधिक उज्ज्वल बनाएगी।
अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस युवाओं के आत्मबल, आत्मविश्वास और राष्ट्रबोध को जाग्रत करने का प्रतीक है।
अपनी अनंत संभावनाओं, समर्थ चिंतन और आधुनिक चेतना से लबरेज देश की यही युवा शक्ति ‘विकसित भारत @2047’ के विराट संकल्प को निश्चित ही सिद्ध करेगी।

डॉ. शुभम चौहान
(भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय युवा पुरस्कार एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्वामी विवेकानंद राज्य युवा पुरस्कार से सम्मानित)

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