ज्ञानतीर्थ सप्रे संग्रहालय में शनिवार, 03 अक्टूबर को अलंकरण तथा पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओमप्रकाश रावत थे। अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव एवं बरकतउल्ला विवि के कुलगुरु अनुपम राजन ने की। पूर्व सांसद तथा मप्र राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के कार्याध्यक्ष रघुनंदन शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे। समारोह में पत्रकारिता एवं लेखन क्षेत्रों में सक्रिय विभूतियों को सम्मानित किया गया। साथ ही तपोनिष्ठ पं. सुंदरलाल श्रीधर स्मृति राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के विजयी प्रतिभागियों को भी पुरस्कृत किया गया।
सप्रे संग्रहालय द्वारा स्थापित हरिकृष्ण दत्त शिक्षा सम्मान प्रोफेसर प्रमोद कुमार (नई दिल्ली), अशोक मानोरिया आंचलिक पत्रकारिता पुरस्कार गोविंद सक्सेना (विदिशा) तथा लक्ष्मीनारायण गुप्त पुरस्कार परितोष वर्मा (जबलपुर) को प्रदान किया गया।
समारोह के मुख्य अतिथि पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओमप्रकाश रावत ने कहा कि आज सप्रे संग्रहालय ने विश्व में अपनी एक पहचान बनाई है। विदेशों में कहीं जाओ तो संग्रहालय के बारे में पूछा जाता है। उन्होंने बताया कि एआई इस तरह के संग्रहालयों को संजाने-संवारने में विशेष उपयोगी साबित हो सकता है। उन्होंने इस तकनीक का लाभ उठाने का सुझाव सप्रे संग्रहालय को दिया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में अनुपम राजन ने कहा कि धरोहर को संभालने में सप्रे संग्रहालय महती भूमिका निभा रहा है। उन्होंने शोधकार्यों के लिए संस्था को समुचित सहयोग दिये जाने का भरोसा भी दिलाया।
विशेष अतिथि रघुनंदन शर्मा ने कहा कि सप्रे संग्रहालय के संस्थापक श्रीधर जी ने सम्मान और पुरस्कारों की एक श्रंंखला तैयार की है। यह सम्मान प्रोत्साहन और प्रेरणा दोनों ही होते हैं। इनके माध्यम से लोगों को प्रोत्साहन मिलता है और श्रेष्ठ कार्य करने की प्रेरणा मिलती है।

डॉ हरिकृष्ण दत्त शिक्षा सम्मान से नवाजे गए भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली के डॉ प्रमोद कुमार ने सप्रे संग्रहालय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस पुरस्कार के लिए चयनित होना मेरे लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
वर्तमान परिदृश्य की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि मेन स्ट्रीम मीडिया, वह चाहे प्रिंट मीडिया हो अथवा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, अपने दर्शक एवं पाठक खोता जा रहा है। ए आई के इस दौर में मीडिया शिक्षा के तौर तरीकों में भी बदलाव की आवश्यकता है। भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली इस दिशा में पहल कर रहा है।
अशोक मनोरिया पुरस्कार से सम्मानित गोविंद सक्सेना ने कहा कि यह मेरे लिए बहुत ही गौरव की बात है कि जिन विभूति के सान्निध्य में रहकर मैंने पत्रकारिता का ककहरा सीखा आज उन्हीं के नाम से मुझे यह सम्मान मिल रहा है।
लक्ष्मीनारायण गुप्त पुरस्कार से सम्मानित परितोष वर्मा ने कहा कि मैंने पत्रकारिता अपने पिता अजीत वर्मा के मार्गदर्शन में शुरु की। पत्रकारिता में वे ही मेरे गुरु भी रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के पुरस्कार हमें अपने कर्तव्य बोध याद दिलाते हैं।

आरंभ में स्वागत वक्तव्य देते हुए संग्रहालय की नवागत उपाध्यक्ष डॉ. अल्पना त्रिवेदी ने बताया कि इस संग्रहालय में करीब पांच करोड़ पृष्ठों से अधिक संदर्भ सामग्री संकलित है। लाखों किताबें हैं जिनका उपयोग कर बारह सौ से अधिक शोधार्थी शोधकार्य पूरा कर चुके हैं। यह यात्रा लगातार जारी है।
संग्रहालय के संस्थापक निदेशक विजयदत्त श्रीधर ने बताया कि अब समय के साथ हमें अपना दायित्व नई पीढ़ी को सौंप देना चाहिए। यह कार्य अब शुरु हो चुका है। संग्रहालय में अब सभी कार्य नए लोग ही संपादित करेंगे हम केवल मार्गदर्शन ही देंगे।
संग्रहालय की ओर से विवेक श्रीधर ने अतिथियों का स्वागत् किया। कार्यक्रम का संचालन पत्रकार ममता यादव ने किया। आभार प्रदर्शन संग्रहालय के निदेशक अरविन्द श्रीधर ने किया।
निबंध प्रतियोगिता के विजयी प्रतिभागी पुरस्कृत

कार्यक्रम के दूसरे चरण में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, गांधीवादी सर्वोदय कार्यकर्ता तपोनिष्ठ पं. सुंदरलाल श्रीधर स्मृति राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया।
‘सडक़ से संसद तक तार-तार होती भाषा की मर्यादा’ विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में प्रदेश भर के युवा प्रतिभागियों ने प्रविष्टियां भेजी थीं।
प्रथम स्थान प्राप्त किया प्रियंका कुशवाह (महाराणा प्रताप शासकीय स्नातक महाविद्यालय, गाडरवारा) ने। द्वितीय स्थान पर सत्यम (माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल) रहे, जबकि साक्षी शर्मा (महाराणा प्रताप शासकीय स्नातक महाविद्यालय, नरसिंहपुर) ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
सात अन्य प्रतिभागियों -सूरज उपाध्याय (रायसेन), प्रीति किरार (गाडरवारा), प्रिया सोनवानी,माधवी यादव (छतरपुर),अनंत वशिष्ठ (भोपाल), पलक कुमारी (भोपाल) तथा मनीष अहिरवार (छतरपुर) को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गए।

