मादक पदार्थों की बढ़ती मांग और इससे जुड़े अपराधियों के गिरोहों के चलते दुनिया में नशे के अवैध कारोबार और तस्करी का जाल फैलता जा रहा है। इस जाल में किशोर युवा फंसते जा रहे हैं। अब जनस्वास्थ्य का सबसे बड़ा संकट बन चुका है। विश्व ड्रग रिपोर्ट 2025 के अनुसार वर्ष 2024 में दुनिया में 316 मिलियन लोग ड्रग का उपयोग कर रहे थे। इसमें एल्कोहल और तंबाकू का सेवन करने वालों की संख्या शामिल नहीं है। ड्रग का सेवन करने वाले प्रति चार व्यक्तियों में एक महिला है।
दुनिया में सबसे बड़ी चिंता इस बात की हो रही है कि 15-16 आयु वर्ग के किशोर नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। इनकी संख्या 15-64 आयु वर्ग द्वारा किए जा रहे कुल ड्रग सेवन करने वालों के बराबर या उससे अधिक हो गई है। किशोर युवा किसी भी देश का भविष्य होते हैं, और यही वर्ग आज सबसे ज्यादा असुरक्षित है। नशे के शिकार ये किशोर समय से पहले मृत्यु या नशीली दवाओं के कारण अनेक मानसिक और शारीरिक विकारों के शिकार हो रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि 15-19 आयु वर्ग में नशे के शिकार किशोर युवाओं में मृत्यु की संभावना, 20 वर्ष या उससे अधिक उम्र के नशा करने वालों की तुलना में 45 प्रतिशत अधिक है।15-19 आयु वर्ग की किशोरियों में नशे के शिकार होने पर मृत्यु की संभावना 20 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों से 68 प्रतिशत ज्यादा है। इस उम्र में नशा सीधे मस्तिष्क के उस हिस्से पर हमला करता है जो निर्णय लेने, जोखिम समझने और आदत बनाने से जुड़ा है।
अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी भारत और उनके किशोर युवाओं को कमजोर करने के लिए जारी है। देश के अंदर सिंथेटिक ड्रग उत्पादन के कारखाने भी चुनौती बने हुए हैं।भारत में भारत माला ने परिवहन को तेज और सुगम बनाया है लेकिन भारत माला के इर्दगिर्द बनती ड्रग माला सिरदर्द बन गई है।भारत पाक सीमा पर स्थित बाड़मेर जिले में से जहां से भारत माला निकल रही है वहां हाल ही में सिंथेटिक नशीली दवा के छह अवैध कारखानें धोरीमना,रामसर,सेडवा,बींजराड इलाके में मिले जिसे जिला पुलिस अधीक्षक नरेंद्र मीना के नेतृत्व में सीज किया गया.इन कारखानों का कनेक्शन मुंबई से बताते हैं।इस तरह भारत के अंदर चुनौतियों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर देशों से तस्करी के मार्ग अंतरराष्ट्रीय गिरोहों ने बना रखे हैं।एक मार्ग ‘गोल्डन क्रिसेंट’ है.इसमें अफगानिस्तान-पाकिस्तान-ईरान से हेरोइन और अफीम की तस्करी पंजाब, जम्मू-कश्मीर और राजस्थान के सीमावर्ती जिलों के रास्ते होती है। पंजाब और राजस्थान के सीमाई इलाकों में युवा सबसे ज्यादा चपेट में हैं। 2024 में बीएसएफ ने अकेले पंजाब बॉर्डर से 500 किलो से ज्यादा हेरोइन पकड़ी। दूसरा मार्ग ‘गोल्डन ट्रायंगल’ है इसमें म्यांमार-लाओस-थाईलैंड से हेरोईन, मेथाम्फेटामाइन ड्रग मणिपुर, मिज़ोरम राज्य में पहुंचती हैं.पूर्वोत्तर में इंफाल, चुराचांदपुर, आइजोल के कॉलेज-स्कूल जाने वाले किशोर इसकी चपेट में हैं। इसके अलावा समुद्री रास्ते से गुजरात के कच्छ, केरल और तमिलनाडु के तट भी तस्करों के निशाने पर हैं।समुद्री मार्ग में गुजरात का मुन्दडा पोर्ट ड्रग तस्करी का प्रमुख केंद्र है.अरब सागर, बंगाल की खाड़ी, हिंद महासागर ड्रग तस्करी के मार्ग बन गए हैं.देश मे सत्तर प्रतिशत ड्रग तस्करी समुद्री मार्ग से हो रही है. डार्क वेब और क्रिप्टोकरेंसी ने इस धंधे को और खतरनाक बना दिया है। बड़े शहरों के युवा भी अपने कमरे में बैठकर मोबाइल से नशा मंगवा लेते हैं और डिलीवरी डाक से हो जाती है।
नशे से जुड़ने के अनेक कारण हैं जिसमें इन रूट से ड्रग की आसान उपलब्धता, दोस्तों का दबाव, उत्सुकता, अकेलापन,गरीबी, पढ़ाई, करियर,घरेलु तनाव,जागरुकता और रचनात्मक कार्यों से न जुड़ पाना प्रमुख है. माता-पिता भी सामान्यत:शुरुआती लक्षण पहचान नहीं पाते।
इन खतरों से बाहर निकालने के लिए जागरुकता, सही परामर्श के लिए किशोर युवाओं को अपने स्तर पर पहल जरूरी है. माता पिता को अपने बच्चों से परस्पर संवाद और सकारात्मक माहौल जरूरी है। इसके अलावा हर किशोर युवा वोलियण्टर के रूप में ,जिम्मेदार नागरिक के रूप में नशे मुक्ति का कार्य घर,स्कूल,कॉलेज, मोहल्ले से शुरु कर सकता है. इस हेतु यहां किशोर युवा मंडल आदि समुह बनाने की जरूरत है। ये समुह खेल, संगीत, रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ाव करे. नुक्कड नाटकों और समुह चर्चाओं में नशा मुक्ति पर बात की जाए. हर किशोर युवा नशा उत्पादन, वितरण, गली-मोहल्ले,ढाणी के आसपास चल रही संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखे औऱ संदेह होने पर पुलिस को सूचित करे। नशे के शिकार साथियों, परिचितों, परिवार सदस्यों एवं अन्य सभी के प्रति सहानुभूति रखते हुए पुनर्वास और परामर्श केंद्रों की सेवाएं दिलवाने में मदद करे। ड्रग तस्करी की रोकथाम अकेले पुलिस और नारकोटिक्स विभाग कुछ भी नहीं कर सकता.किशोर युवा और अन्य नागरिको की भागीदारी जरूरी है।ये सभी पुलिस को सूचना देने मे मददगार हो सकते है।वहीं नए किशोर युवाओं को जागरुकता से नशे से दूर रखकर एवं नशा पीड़ितों को उपचार और परामर्श के रास्ते दिखाकर, जोड़कर ड्रग की मांग शून्य तक लाने के लिए हर युवा का दायित्व बने तो तस्करों के राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय गिरोहों को, वितरकों को पछाड़ा जा सकता है।अंधेरी सुरंग लंबी जरूर है, पर उसका दूसरा छोर उजाले का है। किशोर बचेगा तभी देश का भविष्य बचेगा। भारत नशा मुक्ति की ओर तीव्रता से बढ़ पाएगा.

डॉ. भुवनेश जैन
(पूर्व निदेशक,मेरा युवा भारत,
युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय,भारत सरकार)

